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मथुरा: साइबर ठगों को सिम देने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो पकड़े

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Jan 2023 08:12 PM IST
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Mathura: Gang giving SIM to cyber thugs busted, two arrested
मथुरा। कोसीकलां पुलिस द्वारा साइबर अपराध करने वालों को सिम बेचने के आरोप में पकड़े गए आरोपियों क? - फोटो : KOSI
कोसीकलां (मथुरा)। पुलिस ने प्रीएक्टिवेटेड सिम बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड बनाकर पांच सौ से अधिक सिम एक्टिवेट किए। उसके बाद साइबर ठगों के अलावा अन्य तमाम अपराधियों को ये प्रीएक्टिवेटेड सिम बेचे गए। पुलिस ने उनके कब्जे से लैपटॉप, प्रिंटर, 30 फर्जी आधार कार्ड एवं 63 प्रीपेड सिम कार्ड, चाकू एवं बाइक बरामद किया है। वोडा आइडिया (वीआई) टेलीकॉम कंपनी के सिम बेचते हैं। एक एजेंसी इनके नाम पर है।
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प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार राणा ने बताया कि रविवार को गश्त के दौरान सूचना मिली कि फर्जी आधार कार्ड बनाकर प्रीएक्टिवेटेड सिम साइबर अपराधियों को बेचने वाले गिरोह के दो सदस्यों को बिछोर की तरफ बाइक पर आते हुए पकड़ लिया जो कि प्रीएक्टिवेटेड सिम, फर्जी आधार कार्ड तैयार कर बेचने के लिए लेकर आ रहे थे।
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पकडे़ गए आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 30 फर्जी आधार कार्ड, 63 प्रीपेड सिमकार्ड, दो मोबाइल, एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, एक लेमिनेशन मशीन, बाइक बरामद की। पकड़े गए आरोपियों में रिजवान पुत्र मूवीन, मुशर्रफ पुत्र जमशेद निवासी बिशंभरा, शेरगढ़ हैं। पुलिस टीम में गढ़ी बरवारी चौकी प्रभारी राहुल सिंह, शाहपुर चौकी प्रभारी सोनू भाटी, उप निरीक्षक किरनपाल सिंह, कांस्टेबल सतीश चंद, सुमित कुमार, सोहित कुमार, नितेश कुमार आदि थे।
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वीआई कंपनी की फ्लेक्सी ले रखी थी
आरोपियों ने बताया कि वीआई कंपनी की फ्लेक्सी ले रखी है जिसके द्वारा सिम कार्ड एक्टीवेट करने व रिचार्ज करने के लिए कंपनी द्वारा सिम दिया हुआ है। उक्त फ्लेक्सी की डिटेल को दिखाकर डिस्टिब्यूटर से सिम प्राप्त कर लेते थे। गूगल पर सर्च करके अवैध रूप से आधार नंबर प्राप्त कर नकली आधार कार्ड बना लेते थे। बनाए गए आधार कार्डों का प्रयोग करके सिम को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड की गई स्मार्ट कनेकट नाम की एप्लीकेशन की मदद से सिम एक्टीवेट करके उनका प्रयोग साइबर अपराधियों को बेच देते थे। इन सिमों के माध्यम से काल करके, फर्जी खाता बनाकर धोखाधड़ी करके अवैध रुप से ठगी करते थे।

जो लोग उनके पास से सिम लेने आते थे, उनकी फोटो आरोपी सेव कर लेते थे। फिर इन फोटो का इस्तेमाल कर वेबसाइट की मदद से फर्जी आधार बनाते थे। उसका प्रिंट भी निकालते थे। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद सिम एक्टिव कराते थे। जो भी शख्स आरोपियों के पास जाकर बगैर आईडी के एक्टिवेट सिम मांगता था, उनको ये इसी तरह की फेक आईडी पर लिए गए। सिम 400 से 500 रुपये तक में बेच देते थे।
- गौरव कुमार त्रिपाठी, सीओ, छाता।
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