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मथुरा: जातिगत आंकड़ों के धुरंधरों के सपने हो गए चकनाचूर
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मथुरा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजनीति के उन धुरंधरों के सपने चकनाचूर हो गए हैं, जो कि वर्तमान में जातिगत आधार पर अपनी चुनावी गोटियां सेट करने में जुटे थे। आरक्षण का जो क्रम रखा गया है उसके चलते वह गांव और वार्ड भी आरक्षण मेें आ गए जो कि वर्ष 2015 में जातिगत जनसंख्या कम होने के कारण से वंचित रह गए थे।
पंचायत चुनाव अधिकारियों ने आरक्षण की स्थिति को स्पष्ट करते हुए पहले जातिवार पूरी जनसंख्या का अवरोही क्रम निश्चित किया है। इस अवरोही क्रम से उन गांव और वार्डों को हटा दिया गया जो कि वर्ष 2015 मेें आरक्षित थे। इसके बाद जो भी वार्ड और गांव जनसंख्या के आधार पर आए उनको इस बार आरक्षित किया गया है। इस प्रकार से जो वर्ष 2015 में आरक्षित थे वह इस बार आरक्षण के दायरे में नहीं आए। नए गांव और वार्डों को आरक्षण का अवसर प्रदान किया गया है।
पिछली दफा के दावेदारों को नहीं मिला मौका
प्रधान से लेकर जिला पंचायत सदस्य तक के लिए उन दावेदारों को इस आरक्षण में मौका नहीं मिल सका, जोकि पिछली दफा घोषित सूची में थे। उनके द्वारा अपनी सीट पाने के लिए काफी पैसा जुगाड़ लगाने में खर्च किया था। इस दफा के आरक्षण में पूर्व के दावेदार बनने वालों के हाथों में मायूसी लगी है।
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फर्जी आरक्षण की सूचियां पूरी रात उड़ाती रहीं नींद
शनिवार को डीएम नवनीत चहल की व्यस्तता के चलते डीपीआरओ द्वारा तैयार किए गए आरक्षण पर आधी रात के बाद जाकर मुहर लग सकी। इसके बाद ही आरक्षण की सूची डीपीआरओ कार्यालय पर चस्पा हो पाई, लेकिन कुछ लोगों ने एक फर्जी सूची को वायरल करके कहा जाने लगा कि यह असली सूची है। इसे लेकर रात भर दावेदारों की नींद खराब रही।
सुप्रीम कोर्ट जाने की चर्चा
दावेदारों के बीच यह भी चर्चा चल रही है कि हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जाएगा। जल्द ही इस आरक्षण पर रोक लग सकती है। इस चर्चा से वर्तमान आरक्षण घोषित होने के बाद भी दावेदार असमंजस में पड़े हैं।
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पंचायत चुनाव अधिकारियों ने आरक्षण की स्थिति को स्पष्ट करते हुए पहले जातिवार पूरी जनसंख्या का अवरोही क्रम निश्चित किया है। इस अवरोही क्रम से उन गांव और वार्डों को हटा दिया गया जो कि वर्ष 2015 मेें आरक्षित थे। इसके बाद जो भी वार्ड और गांव जनसंख्या के आधार पर आए उनको इस बार आरक्षित किया गया है। इस प्रकार से जो वर्ष 2015 में आरक्षित थे वह इस बार आरक्षण के दायरे में नहीं आए। नए गांव और वार्डों को आरक्षण का अवसर प्रदान किया गया है।
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पिछली दफा के दावेदारों को नहीं मिला मौका
प्रधान से लेकर जिला पंचायत सदस्य तक के लिए उन दावेदारों को इस आरक्षण में मौका नहीं मिल सका, जोकि पिछली दफा घोषित सूची में थे। उनके द्वारा अपनी सीट पाने के लिए काफी पैसा जुगाड़ लगाने में खर्च किया था। इस दफा के आरक्षण में पूर्व के दावेदार बनने वालों के हाथों में मायूसी लगी है।
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फर्जी आरक्षण की सूचियां पूरी रात उड़ाती रहीं नींद
शनिवार को डीएम नवनीत चहल की व्यस्तता के चलते डीपीआरओ द्वारा तैयार किए गए आरक्षण पर आधी रात के बाद जाकर मुहर लग सकी। इसके बाद ही आरक्षण की सूची डीपीआरओ कार्यालय पर चस्पा हो पाई, लेकिन कुछ लोगों ने एक फर्जी सूची को वायरल करके कहा जाने लगा कि यह असली सूची है। इसे लेकर रात भर दावेदारों की नींद खराब रही।
सुप्रीम कोर्ट जाने की चर्चा
दावेदारों के बीच यह भी चर्चा चल रही है कि हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जाएगा। जल्द ही इस आरक्षण पर रोक लग सकती है। इस चर्चा से वर्तमान आरक्षण घोषित होने के बाद भी दावेदार असमंजस में पड़े हैं।