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मथुरा: ढप धर दै यार गई पर की
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नंदगांव (मथुरा)। जीवन में खुशियों के रंग भरने वाला होली का त्योहार ब्रज में जिस उत्साह के साथ शुरू होता है उसी उमंग एवं सम्मान के साथ इसे विदा किया जाता है। ब्रज की इसी संस्कृति ने संपूर्ण भारत में ब्रज की अलग पहचान है। बृहस्पतिवार को कस्बे के रंगीली चौक पर होलिका दहन के लिए होली सजाई गई।
सुबह से ही महिलाओं का रंगीली चौक पर होलिका पूजन के लिए तांता लगा रहा। महिलाओं ने विधिविधान पूर्वक होलिका पूजन किया। संध्या के समय गोस्वामी समाज के मुखिया छैलबिहारी गोस्वामी के आते ही होली महोत्सव विदाई समारोह प्रारंभ हो गया।
होली की संध्या के समय धोती, बगलबंदी और पटुका से सुसज्जित ब्राह्मण वर्ग एवं अन्य कस्बावासी एकजुट हुए। लठामार होली चौक पर रखी होलिका में भक्त प्रहलाद का परंपरागत विधिविधान से पूजन कर पद गायन किया गया।
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जुर मिल खेलौ फाग होरी मायी बिदा होत है, ब्रज की वधू सब जुर मिल आयीं, कर सोलह शृंगार होरी माई...आदि पद गाकर विदा किया। इसके साथ ही रस लै रे रसिया फाग कौ फाग कौ अनुराग कौ, रसिया कौ मौहल्ला न्यारौ है रसिया कौ, ढप धर दे यार गई पर की आदि पदों का भी गायन भी किया गया।
इस दौरान नए वर्ष में शांति एवं समृद्धि के लिए भी ईश्वर से प्रार्थना की। रसिकों ने इस मदमस्त मास के लिए होरी के खिलैया यार मेरे यार फगुना जाए मत आदि पदों को गायन किया। रात में नंदभवन में समाज गायन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं द्वारा नंदगांव की परिक्रमा की गई।
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सुबह से ही महिलाओं का रंगीली चौक पर होलिका पूजन के लिए तांता लगा रहा। महिलाओं ने विधिविधान पूर्वक होलिका पूजन किया। संध्या के समय गोस्वामी समाज के मुखिया छैलबिहारी गोस्वामी के आते ही होली महोत्सव विदाई समारोह प्रारंभ हो गया।
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होली की संध्या के समय धोती, बगलबंदी और पटुका से सुसज्जित ब्राह्मण वर्ग एवं अन्य कस्बावासी एकजुट हुए। लठामार होली चौक पर रखी होलिका में भक्त प्रहलाद का परंपरागत विधिविधान से पूजन कर पद गायन किया गया।
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जुर मिल खेलौ फाग होरी मायी बिदा होत है, ब्रज की वधू सब जुर मिल आयीं, कर सोलह शृंगार होरी माई...आदि पद गाकर विदा किया। इसके साथ ही रस लै रे रसिया फाग कौ फाग कौ अनुराग कौ, रसिया कौ मौहल्ला न्यारौ है रसिया कौ, ढप धर दे यार गई पर की आदि पदों का भी गायन भी किया गया।
इस दौरान नए वर्ष में शांति एवं समृद्धि के लिए भी ईश्वर से प्रार्थना की। रसिकों ने इस मदमस्त मास के लिए होरी के खिलैया यार मेरे यार फगुना जाए मत आदि पदों को गायन किया। रात में नंदभवन में समाज गायन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं द्वारा नंदगांव की परिक्रमा की गई।