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मथुरा: दाऊजी के हिंडोला दर्शनों को उमड़ी भीड़
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दाऊजी महाराज को हिंडोले में झुलाते सेवायत।
- फोटो : MATHURA
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बलदेव (मथुरा)। रक्षाबंधन पर दाऊजी मंदिर में दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से देर शाम तक भक्त ब्रजराज दाऊजी महाराज के दर्शन करते रहे। मनोहारी हिंडोला में ठाकुरजी के दर्शन कर भक्त धन्य हो गए। भक्तों ने श्रीदाऊजी महाराज को राखी भेंट कर मनौती मांगी।
शाम को हिंडोला दर्शनों का भव्य आयोजन हुआ। एकादशी से रक्षाबंधन तक हिंडोला दर्शन के साथ हजारा आरती का आयोजन किया गया। इसमें हजार दीपों के साथ हजारा आरती हुई। दाऊजी महाराज की विशाल प्रतिमा को झुलाना किसी झूले में संभव नहीं है। इसलिए हिंडोला में प्रतिदिन उनके प्रतिबिंब, मुकुट एवं बांसुरी को झुलाया जाता है।
श्री दाऊजी की विशाल प्रतिमा को किसी भी हिंडोला या झूले में झूलाना संभव नहीं है, अत: उनके सम्मुख जगमोहन में स्वर्ण जड़ित हिंडोला को स्थापित किया जाता है। हिंडोला में स्वर्ण जड़ित दर्पण रख कर उनके प्रतिबिंब व मुकुट व बांसुरी को रेशम की डोरी से श्री कल्याण देव जी के वंशज विशेष पद गायन के साथ हिंडोला को धीरे-धीरे झोटा देकर झुलाते हैं। हिंडोला के समीप सावन माह के झूला के विशेष पद गायन होता है।
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शाम को हिंडोला दर्शनों का भव्य आयोजन हुआ। एकादशी से रक्षाबंधन तक हिंडोला दर्शन के साथ हजारा आरती का आयोजन किया गया। इसमें हजार दीपों के साथ हजारा आरती हुई। दाऊजी महाराज की विशाल प्रतिमा को झुलाना किसी झूले में संभव नहीं है। इसलिए हिंडोला में प्रतिदिन उनके प्रतिबिंब, मुकुट एवं बांसुरी को झुलाया जाता है।
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श्री दाऊजी की विशाल प्रतिमा को किसी भी हिंडोला या झूले में झूलाना संभव नहीं है, अत: उनके सम्मुख जगमोहन में स्वर्ण जड़ित हिंडोला को स्थापित किया जाता है। हिंडोला में स्वर्ण जड़ित दर्पण रख कर उनके प्रतिबिंब व मुकुट व बांसुरी को रेशम की डोरी से श्री कल्याण देव जी के वंशज विशेष पद गायन के साथ हिंडोला को धीरे-धीरे झोटा देकर झुलाते हैं। हिंडोला के समीप सावन माह के झूला के विशेष पद गायन होता है।
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