{"_id":"61c339f24223c97faf465084","slug":"mathura-colonel-solved-40-years-old-drinking-water-problem-of-his-village-mathura-news-mtr510534796","type":"story","status":"publish","title_hn":"मथुरा: कर्नल ने सुलझाई अपने गांव की ४० वर्ष पुरानी पेयजल समस्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मथुरा: कर्नल ने सुलझाई अपने गांव की ४० वर्ष पुरानी पेयजल समस्या
विज्ञापन
गांव हर्दपुर में पानी भरतीं महिलाएं।
मथुरा। सेना से रिटायर्ड हुए कर्नल बीपी सिंह जब गांव पहुंचे तो पुरानी समस्या से रूबरू हुए। खारी पानी के कारण गांव की महिलाएं गांव के बाहर से मीठा पानी सिर पर ढोकर लाने के लिए ४० वर्ष बाद भी मजबूर थीं।
अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा से उनके द्वारा गांव के बाहर मीठे पानी की बोरिंग कराई गई और पाइपलाइन बिछवाकर करीब एक हजार ग्रामीणों को मीठा पानी दिया गया।
यह गांव मांट का गांव हर्दपुर है। गांव के अंदर का पानी खारी होने के कारण यहां की महिलाएं बच्चे गांव के बाहर से पानी लेकर आते थे। इसी गांव की मिट्टी में पले बढ़े बीपी सिंह सेना में कर्नल के पद पर तैनात रहे। सेना से रिटायर्ड होने के बाद वह लखनऊ में सैनिक कल्याण बोर्ड के निदेशक रहे।
इसके बाद जब वह गांव लौटे तो उन्होंने पेयजल समस्या के निस्तारण की ठान ली। उनके द्वारा पड़ोसी गांव से बसेला से कुछ जमीन पानी की बोरिंग के लिए मांगी। जिसे ग्रामीणों ने सहर्ष दे दिया। इसके बाद कर्नल बीपी सिंह ने वहां पर न केवल पानी की बोरिंग कराई बल्कि इमरजेंसी में पानी की आवश्यकता को देखते हुए पानी की टंकी भी रखवाईं। उन्होंने बताया कि यह काम करने पर उन्हें आत्मिक संतुष्टि प्राप्त हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा से उनके द्वारा गांव के बाहर मीठे पानी की बोरिंग कराई गई और पाइपलाइन बिछवाकर करीब एक हजार ग्रामीणों को मीठा पानी दिया गया।
यह गांव मांट का गांव हर्दपुर है। गांव के अंदर का पानी खारी होने के कारण यहां की महिलाएं बच्चे गांव के बाहर से पानी लेकर आते थे। इसी गांव की मिट्टी में पले बढ़े बीपी सिंह सेना में कर्नल के पद पर तैनात रहे। सेना से रिटायर्ड होने के बाद वह लखनऊ में सैनिक कल्याण बोर्ड के निदेशक रहे।
विज्ञापन
इसके बाद जब वह गांव लौटे तो उन्होंने पेयजल समस्या के निस्तारण की ठान ली। उनके द्वारा पड़ोसी गांव से बसेला से कुछ जमीन पानी की बोरिंग के लिए मांगी। जिसे ग्रामीणों ने सहर्ष दे दिया। इसके बाद कर्नल बीपी सिंह ने वहां पर न केवल पानी की बोरिंग कराई बल्कि इमरजेंसी में पानी की आवश्यकता को देखते हुए पानी की टंकी भी रखवाईं। उन्होंने बताया कि यह काम करने पर उन्हें आत्मिक संतुष्टि प्राप्त हुई है।
विज्ञापन