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मथुरा: शहर के साथ अब जाम से जूझ रही कलक्ट्रेट
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कलक्ट्रेट परिसर में जाम में फंसे वाहन।
- फोटो : VRINDAVAN
मथुरा। मथुरा-वृंदावन शहरी क्षेत्र के साथ अब कलक्ट्रेट परिसर की सड़कें भी जाम से जूझने लगी हैं। यहां डीएम कार्यालय, सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय और वट वृक्ष के आसपास वाहनों का दिन भर जमावड़ा रहता है।
यहां पल-पल में लगने वाले जाम के कारण वाहनों के हॉर्न की आवाज भी गूंजती रहती है। इससे कलक्ट्रेट पहुंचने वाले लोग परेशान रहते हैं।
जिला प्रशासन ने कलक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार के निकट ही पार्किंग स्थल की व्यवस्था की है। इस पार्किंग का संचालन ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। इसके बावजूद कलक्ट्रेट परिसर में जाम की समस्या पैदा होने लगी है। प्रभावशाली लोग इस पार्किंग के बजाए अपनी गाड़ियों को कलक्ट्रेट की संकरी सड़कों पर ही पार्क कर रहे हैं। यह स्थिति जिलाधिकारी कार्यालय के सामने से ही शुरू हो जाती है, जो एनआईसी कक्ष, खाद्य एवं औषधि कार्यालय और कलक्ट्रेट सभाकक्ष के साथ सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के आसपास दिखाई देती है।
सड़क पर वाहनों की यह पार्किंग कलक्ट्रेट में जाम की समस्या को उत्पन्न करती है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और ठेकेदारों ने कलक्ट्रेट में जिला अल्पसंख्यक अधिकारी कार्यालय के आसपास के मार्ग को भी पार्किंग स्थल बना दिया है। पीडब्ल्यूडी के अधिकांश ठेकेदार कलक्ट्रेट की अधिकृत पार्किंग की व्यवस्था को नजरंदाज करते हुए विभागीय कार्यालय के सामने ही गाड़ियों को खड़ा करते हैं।
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इन स्थितियों के चलते पिछले कुछ माह से कलक्ट्रेट परिसर वाहन पार्किंग में तब्दील हो गया है। सिटी मजिस्ट्रेट जवाहर लाल श्रीवास्तव ने बताया कि इस स्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है। नियत स्थान पर ही वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
कलक्ट्रेट में पीने के पानी का संकट
जनपद भर से हजारों लोग प्रतिदिन विभिन्न कारणों से कलक्ट्रेट पहुंचते हैं। कोई डीएम से फरियाद करने आता है तो कोई चकबंदी सहित अन्य विभागीय कार्यों को लेकर यहां पहुंचता है। ८० से ९० किलोमीटर की दूरी तय करके यहां पहुंचने पर लोगों को पीने के लिए पानी भी उपलब्ध नहीं है। लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है। नौहझील से आए आशीष कुमार ने कहा कि कलक्ट्रेट में पीने के पानी भी नसीब नहीं है।
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यहां पल-पल में लगने वाले जाम के कारण वाहनों के हॉर्न की आवाज भी गूंजती रहती है। इससे कलक्ट्रेट पहुंचने वाले लोग परेशान रहते हैं।
जिला प्रशासन ने कलक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार के निकट ही पार्किंग स्थल की व्यवस्था की है। इस पार्किंग का संचालन ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। इसके बावजूद कलक्ट्रेट परिसर में जाम की समस्या पैदा होने लगी है। प्रभावशाली लोग इस पार्किंग के बजाए अपनी गाड़ियों को कलक्ट्रेट की संकरी सड़कों पर ही पार्क कर रहे हैं। यह स्थिति जिलाधिकारी कार्यालय के सामने से ही शुरू हो जाती है, जो एनआईसी कक्ष, खाद्य एवं औषधि कार्यालय और कलक्ट्रेट सभाकक्ष के साथ सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के आसपास दिखाई देती है।
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सड़क पर वाहनों की यह पार्किंग कलक्ट्रेट में जाम की समस्या को उत्पन्न करती है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और ठेकेदारों ने कलक्ट्रेट में जिला अल्पसंख्यक अधिकारी कार्यालय के आसपास के मार्ग को भी पार्किंग स्थल बना दिया है। पीडब्ल्यूडी के अधिकांश ठेकेदार कलक्ट्रेट की अधिकृत पार्किंग की व्यवस्था को नजरंदाज करते हुए विभागीय कार्यालय के सामने ही गाड़ियों को खड़ा करते हैं।
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इन स्थितियों के चलते पिछले कुछ माह से कलक्ट्रेट परिसर वाहन पार्किंग में तब्दील हो गया है। सिटी मजिस्ट्रेट जवाहर लाल श्रीवास्तव ने बताया कि इस स्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है। नियत स्थान पर ही वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
कलक्ट्रेट में पीने के पानी का संकट
जनपद भर से हजारों लोग प्रतिदिन विभिन्न कारणों से कलक्ट्रेट पहुंचते हैं। कोई डीएम से फरियाद करने आता है तो कोई चकबंदी सहित अन्य विभागीय कार्यों को लेकर यहां पहुंचता है। ८० से ९० किलोमीटर की दूरी तय करके यहां पहुंचने पर लोगों को पीने के लिए पानी भी उपलब्ध नहीं है। लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है। नौहझील से आए आशीष कुमार ने कहा कि कलक्ट्रेट में पीने के पानी भी नसीब नहीं है।