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मथुरा: जोधपुर झाल पर दिखा मलार्ड बतख का जोड़ा

Sun, 04 Apr 2021 06:31 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 04 Apr 2021 06:31 PM IST
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Mathura: A pair of malard ducks shown on the Jodhpur Jhala
मथुरा। जोधपुर झाल में विचरण करती मलार्ड बतख। - फोटो : MATHURA
फरह (मथुरा)। जोधपुर झाल पर प्रवास को आए सुदूर देशों के अधिकांश पक्षी मार्च के अंत तक वापस लौट चुके हैं। इसी क्रम में सुंदरता का धनी मलार्ड बतख का एक जोड़ा चार दिन से जोधपुर झाल के एक तालाब पर रुका हुआ है।
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दक्षिण अमेरिका को छोड़ कर सभी उप महाद्वीपों में इसकी उपस्थिति दर्ज की गई है। भारत में मलार्ड सर्दियों के प्रवास पर दिसंबर-जनवरी में पहुंचता है। मध्य एशियाई देश उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, पश्चिमी चीन से यह भारत के उत्तर पश्चिम के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से प्रवास पर आता है। इसके प्रजनन स्थल यूरेशिया के क्षेत्र रूस, मंगोलिया, चीन और साइबेरिया हैं।
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जैव विविधता के अध्ययन और संरक्षण से जुड़ी संस्था बीआरडीएस के अध्यक्ष पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क में इस बार पांच जोड़े मलार्ड बतख के देखे गए थे। आगरा में बाह के चंबल में भी मलार्ड की उपस्थिति रिकॉर्ड की गई थी। मथुरा के जोधपुर झाल पर जनवरी में एक जोड़ा और मार्च में 28 से 31 मार्च तक एक जोड़ा देखा गया है। संभावना है कि भरतपुर जाते और लौटते समय यह जोड़ा जोधपुर झाल पर रुक गया है। अधिकांश पक्षी माइग्रेशन रूट में भी विभिन्न स्थानों पर ठहर कर आगे बढ़ते हैं।
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सर्वभक्षी होता है मलार्ड बतख
मलार्ड के भोजन में कीट, भृंग, मक्खियां, लेपिडोप्टेरान, ड्रैगनफलीज, कैडफिस्ले, क्रस्टेशियन, कृमि, कई प्रकार के बीज और पौधे के भाग और जड़ें और कंद मुख्य रूप से शामिल हैं।

नर मलार्ड होता है आकर्षक, जोड़े बनाकर निकलते हैं प्रवास पर
डॉ. केपी सिंह के अनुसार मलार्ड को हिंदी में नीलसर कहते हैं। इसका कारण है इसके गहरे नीले रंग का सिर होना। पीली चोंच इसकी सुंदरता को और बढ़ाती है। उत्तरी गोलार्ध में अक्तूबर-नवंबर में मलार्ड बतख अपने आवासीय क्षेत्रों से नर व मादा जोड़े बनाकर प्रवास पर निकलते हैं। मादा मलार्ड अलग-अलग चरणों में आठ से तेरह तक अंडे देती है। अंडों का रंग सफेद व हल्का भूरा होता है। इंक्यूबेटिंग का समय लगभग एक माह का होता है। 50 से 60 दिन में चूजे उड़ने में सक्षम हो जाते हैं।
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