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किसानों के लिए कृषि मंडी के खुले द्वार
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मथुरा। डॉकडाउन के दौरान खाद्यान्न की किल्लत पैदा न हो, इसे देखते हुए जिले की सभी मंडी और उप मंडियों के द्वार किसानों के लिए खोल दिए गए हैं। किसान अपना गेहूं किसी भी मंडी में बेच सकता है। इसके लिए रविवार को हाईवे स्थित कृषि मंडी सहित राया, गोवर्धन और सौंख की उप मंडियों में भी आढ़तियों ने साफ सफाई शुरू कर दी है।
कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन में बंद मंडियों को एक बार फिर खोलने का निर्णय लिया गया है। इस आदेश के तहत रविवार से ही मंडियों में आढ़तियों की हलचल शुरू हो गई है। रविवार को हाईवे स्थित कृषि मंडी मथुरा में आढ़तियों ने सफाई का काम शुरू कर दिया। मजदूरों को मंडी आने की सूचना दे दी। मंडी सचिव सुनील शर्मा ने बताया कि मथुरा के साथ उप मंडी राया, गोवर्धन, सौंख को भी खोल दिया गया है। अब किसान मंडियों में अपना गेहूं बेच सकता है। उसे किसी प्रकार की परेशानी घर से मंडी तक पहुंचने में नहीं आएगी।
उन्होंने बताया कि फ्लोर मालिकों को भी किसानों से सीधे गेहूं खरीद की अनुमति दी गई है। मंडी सचिव सुनील शर्मा ने बताया कि पहली प्राथमिकता जनपद के लिए खाद्यान्न खरीद की रहेगी। इसके बाद सरप्लस गेहूं आने पर पड़ोसी जिला आगरा और फिरोजाबाद को भेजने की भी योजना है। इन दोनों जिलों में गेहूं उत्पादन कम है। यहां आलू की फसल का उत्पादन मथुरा से ज्यादा होता है। इसलिए इन दोनों जिलों को मथुरा की पूर्ति होने के बाद गेहूं की आपूर्ति की जा सकती है।
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कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन में बंद मंडियों को एक बार फिर खोलने का निर्णय लिया गया है। इस आदेश के तहत रविवार से ही मंडियों में आढ़तियों की हलचल शुरू हो गई है। रविवार को हाईवे स्थित कृषि मंडी मथुरा में आढ़तियों ने सफाई का काम शुरू कर दिया। मजदूरों को मंडी आने की सूचना दे दी। मंडी सचिव सुनील शर्मा ने बताया कि मथुरा के साथ उप मंडी राया, गोवर्धन, सौंख को भी खोल दिया गया है। अब किसान मंडियों में अपना गेहूं बेच सकता है। उसे किसी प्रकार की परेशानी घर से मंडी तक पहुंचने में नहीं आएगी।
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उन्होंने बताया कि फ्लोर मालिकों को भी किसानों से सीधे गेहूं खरीद की अनुमति दी गई है। मंडी सचिव सुनील शर्मा ने बताया कि पहली प्राथमिकता जनपद के लिए खाद्यान्न खरीद की रहेगी। इसके बाद सरप्लस गेहूं आने पर पड़ोसी जिला आगरा और फिरोजाबाद को भेजने की भी योजना है। इन दोनों जिलों में गेहूं उत्पादन कम है। यहां आलू की फसल का उत्पादन मथुरा से ज्यादा होता है। इसलिए इन दोनों जिलों को मथुरा की पूर्ति होने के बाद गेहूं की आपूर्ति की जा सकती है।
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