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UP: पैसे के दम पर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण; चोरी, हत्या और हमला पेशा, ऐसे बड़ा खिलाड़ी बन गया तेल माफिया
Thu, 29 Feb 2024 08:43 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला, मथुरा
अमर उजाला, मथुरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Thu, 29 Feb 2024 08:43 AM IST
सार
तेल माफिया मनोज अग्रवाल ने पैसे के दम पर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण हासिल किया। बैरी अग्निकांड में पहली बार इसका नाम सामने आया। इस तरह यह जरायम की सीढ़ियां चढ़ता गया और बड़ा खिलाड़ी बन गया।
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Arrested demo
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मथुरा में रिफाइनरी से पेट्रोलियम पदार्थों की चोरी और तेल लाइन में सेंधमारी कर माफिया मनोज अग्रवाल ने अपार संपत्ति अर्जित की। फिर इसे आगरा के मनोज गोयल का साथ मिला। इसके बाद पैसों के दम पर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त किया था। पैसे का रुतबा ऐसा जमाया कि अपनी काली करतूतों के मुकदमों में फाइलें तक बंद करा लीं। हालांकि 2017 के बाद पुलिस के कुछ अधिकारियों ने इस पर शिकंजा कसा।
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मनोज अग्रवाल मूलरूप से फरह थाना क्षेत्र के बेरी गांव का रहने वाला है। बैरी अग्निकांड में पहली बार उसका नाम सामने आया। वर्ष 2000 में उस पर मुकदमा भी दर्ज हुआ। पांच साल में मनोज अग्रवाल तेल के खेल का बड़ा खिलाड़ी बन गया। वर्ष 2005 में बिटुमिन और तेल चोरी के साथ-साथ काले तेल पर पूरी तरह से कब्जा करने के लिए गैंगवार शुरू हो गया।
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21 मुकदमे हैं दर्ज
कोतवाली में मनोज अग्रवाल के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई और इसी के साथ तीसरा गैंग उभरा। इसका मुखिया स्थानीय माधवपुरी कॉलोनी निवासी सुरेश चंद्र बना। इनकी गैंगवार का शांत कराने व धंधे को बढ़ाने के लिए आगरा के मनोज गोयल ने बिचौलिया की भूमिका निभाई थी। इसके बाद मनोज अग्रवाल के खिलाफ हत्या, चोरी, गैंगस्टर, जानलेवा हमले के 21 मुकदमा दर्ज हुए।
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