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Mathura News: एक ही प्लॉट कई लोगों को बेचने का आरोपी गिरफ्तार
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वृंदावन। छाता क्षेत्र में एक ही भूमि पर प्लॉटों को अलग-अलग लोगों के नाम बेचकर धोखाधड़ी करने के मामले में पुलिस ने आरोपी राजीव बंसल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर विवादित भूमि को विवादमुक्त बताकर लोगों को प्लॉट बेचने, कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने और एक ही प्लॉट का कई लोगों के नाम बैनामा कराने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
वृंदावन निवासी नरेंद्र सिंह चौहान ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके अनुसार नरेंद्र सिंह चौहान और दिल्ली निवासी जेएन अग्रवाल ने वर्ष 2025 में छाता क्षेत्र में करीब 8100 वर्गगज भूमि के नौ प्लाट दिल्ली के जनकपुरी निवासी राजीव बंसल से खरीदे थे। आरोप है कि राजीव बंसल और उसके साथियों ने भूमि को पूरी तरह विवादमुक्त बताते हुए खरीदारों को कॉलोनी में सड़क, बाउंड्रीवाल, गेट, सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट समेत अन्य विकास कार्य कराने का भरोसा दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्लॉट खरीदने के काफी समय बाद तक कोई विकास कार्य नहीं कराया गया। वहीं जब भूमि के अभिलेखों की जांच कराई तो पता चला कि संबंधित भूमि का कुछ हिस्सा पहले ही अन्य लोगों को बेचा जा चुका था। वहीं भूमि से जुड़े विवाद न्यायालय में विचाराधीन थे। इसके बावजूद उसी भूमि के प्लाटों की बिक्री जारी रखी गई। आरोप लगाया गया है कि कुछ प्लाटों के संबंध में फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बैनामे कराए गए। बकौल नरेंद्र, जब उन्होंने अपने खरीदे गए प्लाटों पर बाउंड्रीवाल का निर्माण और कब्जा लेने का प्रयास किया तो दूसरे पक्ष के लोगों ने विरोध कर दिया। इस पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। पीड़ित परिवार ने इस मामले में पुलिस उपमहानिरीक्षक शैलेश पांडेय से शिकायत की थी। उनके आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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वृंदावन निवासी नरेंद्र सिंह चौहान ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके अनुसार नरेंद्र सिंह चौहान और दिल्ली निवासी जेएन अग्रवाल ने वर्ष 2025 में छाता क्षेत्र में करीब 8100 वर्गगज भूमि के नौ प्लाट दिल्ली के जनकपुरी निवासी राजीव बंसल से खरीदे थे। आरोप है कि राजीव बंसल और उसके साथियों ने भूमि को पूरी तरह विवादमुक्त बताते हुए खरीदारों को कॉलोनी में सड़क, बाउंड्रीवाल, गेट, सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट समेत अन्य विकास कार्य कराने का भरोसा दिया।
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शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्लॉट खरीदने के काफी समय बाद तक कोई विकास कार्य नहीं कराया गया। वहीं जब भूमि के अभिलेखों की जांच कराई तो पता चला कि संबंधित भूमि का कुछ हिस्सा पहले ही अन्य लोगों को बेचा जा चुका था। वहीं भूमि से जुड़े विवाद न्यायालय में विचाराधीन थे। इसके बावजूद उसी भूमि के प्लाटों की बिक्री जारी रखी गई। आरोप लगाया गया है कि कुछ प्लाटों के संबंध में फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बैनामे कराए गए। बकौल नरेंद्र, जब उन्होंने अपने खरीदे गए प्लाटों पर बाउंड्रीवाल का निर्माण और कब्जा लेने का प्रयास किया तो दूसरे पक्ष के लोगों ने विरोध कर दिया। इस पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। पीड़ित परिवार ने इस मामले में पुलिस उपमहानिरीक्षक शैलेश पांडेय से शिकायत की थी। उनके आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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