{"_id":"693723690066ab2ca90dd0bd","slug":"mahalakshmi-continues-to-meditate-in-belvan-today-mathura-news-c-29-mtr1013-491951-2025-12-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: बेलवन में आज भी तपस्या कर रहीं महालक्ष्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: बेलवन में आज भी तपस्या कर रहीं महालक्ष्मी
विज्ञापन
महालक्ष्मी जी का विग्रह।
कुशल प्रताप सिंह
मांट। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण मांट के निकटवर्ती वन बेलवन में रास रचाने आया करते थे। ऐसे ही एक बार जब भगवान वहां रास रचाने आए और उन्होंने बांसुरी बजाई तो उसकी आवाज देवलोक और स्वर्गलोक तक पहुंची। महालक्ष्मी ने नारदजी से पूछा कि यह आवाज कैसी है। नारद जी बोले कि बेलवन में भगवान श्रीकृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं। महालक्ष्मी बेलवन में आ गईं और रास में प्रवेश करना चाहा, पर वहां पर मौजूद गोपियों ने उन्हें रोक दिया।
महालक्ष्मी ने गोपियों को भला-बुरा कह डाला जो भगवान को बुरा लगा। उन्होंने महालक्ष्मी से कहा कि यह साधारण गोपियां नहीं हैं। इन गोपियों ने मेरे रास में शामिल होने के लिए हजारों वर्ष तपस्या की है। यदि आपको भी रास में शामिल होना है तो पहले हजारों वर्ष तपस्या कर गोपियों को प्रसन्न करना होगा। तब आपको रास में शामिल किया जाएगा। मान्यता है कि तभी से महालक्ष्मीजी यहां गोपी रूप में तपस्या कर लोगों की मनोकामना पूर्ण कर रही हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय इस वन में बेल की प्रचुरता के कारण इस स्थान को बेलवन कहा जाता है। बेलवन वृंदावन से मात्र दो किलोमीटर दूर है।
महालक्ष्मी मंदिर समिति के अध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि यहां महालक्ष्मी तपस्या कर रही हैं। स्वंय भगवान श्रीकृष्ण उनकी सेवा करते हुए महालक्ष्मी को खिचड़ी का प्रसाद खिला रहे हैं। इसी वजह से यहां पौष माह के प्रत्येक बृहस्पतिवार को मेले में खिचड़ी के प्रसाद का महत्व है। यहां प्रत्येक बृहस्पतिवार को हजारों श्रद्धालु मेले में खिचड़ी गजक, रेबड़ी का प्रसाद महालक्ष्मी को अर्पित करते हैं और प्रसाद के रूप में खिचड़ी का भंडारा किया जाता है। संवाद
विज्ञापन
11 दिसंबर को यहां पहला मेला शुरू हो रहा है और इस बार पौष माह में चार मेले लगेंगे। इसके लिए शासन-प्रसाशन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। मेले को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए मांट थाना प्रभारी निरीक्षक जसवीर सिंह के नेतृत्व में पीएसी कंपनी के अलावा आसपास के सभी थानों से पुलिस बल को तैनात किया जा रहा है। वहीं दो पार्किंग की भी व्यस्वथा की गई है। संवाद
विज्ञापन
मांट। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण मांट के निकटवर्ती वन बेलवन में रास रचाने आया करते थे। ऐसे ही एक बार जब भगवान वहां रास रचाने आए और उन्होंने बांसुरी बजाई तो उसकी आवाज देवलोक और स्वर्गलोक तक पहुंची। महालक्ष्मी ने नारदजी से पूछा कि यह आवाज कैसी है। नारद जी बोले कि बेलवन में भगवान श्रीकृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं। महालक्ष्मी बेलवन में आ गईं और रास में प्रवेश करना चाहा, पर वहां पर मौजूद गोपियों ने उन्हें रोक दिया।
महालक्ष्मी ने गोपियों को भला-बुरा कह डाला जो भगवान को बुरा लगा। उन्होंने महालक्ष्मी से कहा कि यह साधारण गोपियां नहीं हैं। इन गोपियों ने मेरे रास में शामिल होने के लिए हजारों वर्ष तपस्या की है। यदि आपको भी रास में शामिल होना है तो पहले हजारों वर्ष तपस्या कर गोपियों को प्रसन्न करना होगा। तब आपको रास में शामिल किया जाएगा। मान्यता है कि तभी से महालक्ष्मीजी यहां गोपी रूप में तपस्या कर लोगों की मनोकामना पूर्ण कर रही हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय इस वन में बेल की प्रचुरता के कारण इस स्थान को बेलवन कहा जाता है। बेलवन वृंदावन से मात्र दो किलोमीटर दूर है।
विज्ञापन
महालक्ष्मी मंदिर समिति के अध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि यहां महालक्ष्मी तपस्या कर रही हैं। स्वंय भगवान श्रीकृष्ण उनकी सेवा करते हुए महालक्ष्मी को खिचड़ी का प्रसाद खिला रहे हैं। इसी वजह से यहां पौष माह के प्रत्येक बृहस्पतिवार को मेले में खिचड़ी के प्रसाद का महत्व है। यहां प्रत्येक बृहस्पतिवार को हजारों श्रद्धालु मेले में खिचड़ी गजक, रेबड़ी का प्रसाद महालक्ष्मी को अर्पित करते हैं और प्रसाद के रूप में खिचड़ी का भंडारा किया जाता है। संवाद
विज्ञापन
11 दिसंबर को यहां पहला मेला शुरू हो रहा है और इस बार पौष माह में चार मेले लगेंगे। इसके लिए शासन-प्रसाशन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। मेले को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए मांट थाना प्रभारी निरीक्षक जसवीर सिंह के नेतृत्व में पीएसी कंपनी के अलावा आसपास के सभी थानों से पुलिस बल को तैनात किया जा रहा है। वहीं दो पार्किंग की भी व्यस्वथा की गई है। संवाद