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Mathura News: मानागढ़ी में लंपी बीमारी का प्रकोप, 5 गोवंशों की मौत, दर्जनों बीमार
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नौहझील। क्षेत्र के गांव मानागढ़ी में लंपी त्वचा रोग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। बीते तीन से चार दिनों के भीतर इस बीमारी की चपेट में आकर एक के बाद एक पांच गोवंशों ने दम तोड़ दिया, जिससे ग्रामीणों और पशुपालकों में हड़कंप मचा हुआ है। गांव में अभी भी लगभग दो दर्जन से अधिक गोवंश इस बीमारी की गिरफ्त में हैं। पशुपालकों का आरोप है कि पशुपालन विभाग को समय रहते सूचना देने के बावजूद टीकाकरण नहीं कराया गया, जिससे बीमारी फैलती चली गई। लाचार किसान अब देसी नुस्खों और अपंजीकृत डॉक्टरों के सहारे अपने मवेशियों की जान बचाने को मजबूर हैं।
गांव के किसान सर्वेश चौधरी ने बताया कि लंपी के कारण पशुपालक किशोर सेठ, होशियार, कृपाल, मनपाल और हरवीर के एक-एक गोवंश की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि उनके खुद के घर में एक गाय और बछड़ा लंपी से पीड़ित हैं, जिनका वे घर पर ही देसी इलाज कर रहे हैं। वहीं सुभाष चौधरी, सतीश, संतवीर सिंह, गल्ली महाशय, अरविंद, सोलू, वेदन सिंह और अरुण सहित कई ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि नौहझील पशु चिकित्सालय में पहले ही शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन जब तक विभागीय टीम जागी, तब तक बीमारी पूरे गांव में पैर पसार चुकी थी। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष चौधरी ने बताया कि मानागढ़ी में दिन-ब-दिन लंपी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सरकारी अस्पताल से तुरंत मदद न मिलने के कारण किसान अपंजीकृत डॉक्टरों से महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
पीड़ित पशुपालक हरवीर सिंह ने बताया कि मेरी गाय की आंख के सामने मौत हो गई। पशु विभाग की टीम तब पहुंची जब बीमारी घर-घर फैल गई। अब जाकर टीकाकरण किया जा रहा है, जबकि पहले बचाव किया जा सकता था। पशु चिकित्सालय नौहझील पर तैनात वेटरिनरी फार्मासिस्ट पीएम शर्मा ने विभागीय लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि गांव में अब तक तीन बार वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा चुका है। वर्तमान में भी पुष्पेंद्र, हरवीर सिंह और देवेंद्र की टीम मानागढ़ी, खाजपुर तथा मडुका में लगातार टीकाकरण और उपचार कर रही है।
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गांव के किसान सर्वेश चौधरी ने बताया कि लंपी के कारण पशुपालक किशोर सेठ, होशियार, कृपाल, मनपाल और हरवीर के एक-एक गोवंश की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि उनके खुद के घर में एक गाय और बछड़ा लंपी से पीड़ित हैं, जिनका वे घर पर ही देसी इलाज कर रहे हैं। वहीं सुभाष चौधरी, सतीश, संतवीर सिंह, गल्ली महाशय, अरविंद, सोलू, वेदन सिंह और अरुण सहित कई ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि नौहझील पशु चिकित्सालय में पहले ही शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन जब तक विभागीय टीम जागी, तब तक बीमारी पूरे गांव में पैर पसार चुकी थी। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष चौधरी ने बताया कि मानागढ़ी में दिन-ब-दिन लंपी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सरकारी अस्पताल से तुरंत मदद न मिलने के कारण किसान अपंजीकृत डॉक्टरों से महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
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पीड़ित पशुपालक हरवीर सिंह ने बताया कि मेरी गाय की आंख के सामने मौत हो गई। पशु विभाग की टीम तब पहुंची जब बीमारी घर-घर फैल गई। अब जाकर टीकाकरण किया जा रहा है, जबकि पहले बचाव किया जा सकता था। पशु चिकित्सालय नौहझील पर तैनात वेटरिनरी फार्मासिस्ट पीएम शर्मा ने विभागीय लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि गांव में अब तक तीन बार वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा चुका है। वर्तमान में भी पुष्पेंद्र, हरवीर सिंह और देवेंद्र की टीम मानागढ़ी, खाजपुर तथा मडुका में लगातार टीकाकरण और उपचार कर रही है।
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