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Mathura News: सभी कलाओं के मूल स्रोत हैं भगवान श्रीकृष्ण
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वृंदावन। शोध संस्थान में 57वें स्थापना दिवस समारोह के पहले दिन बृहस्पतिवार को विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। यह कार्यक्रम विश्व धरोहर सप्ताह एवं भजगोविंदम राष्ट्रीय महोत्सव के तहत वैदेही रामायण कला संग्रहालय, सहरसा एवं हिमालय विश्व संग्रहालय, सिक्किम और नृत्य मलंचा, सिलीगुड़ी के संयुक्त तत्वावधान में हुए।
मुख्य अतिथि प्रो. डाॅ. बुद्धरश्मि मणि, महानिदेशक, राष्ट्रीय संग्रहालय एवं कुलपति, भारतीय विरासत संस्थान ने कहा कि सभी कलाओं के मूल स्रोत भगवान श्रीकृष्ण हैं। उनके बिना किसी भी कला की कल्पना करना असंभव है। कार्यक्रम अध्यक्ष स्वामी गोविंदानंद तीर्थ ने कहा धर्मशास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण 64 कलाओं में निपुण थे। विशिष्ट अतिथि अनूप कुमार गुप्ता, प्रति-कुलपति, जीएलए विवि ने बताया वृंदावन शोध संस्थान ने ब्रज संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं वह सराहनीय हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत श्रीकृष्ण भजन आनंद कुमार मलिक द्वारा श्रीकृष्ण स्तुति कृति एवं रचना भट्ट द्वारा, दशावतार ओडिशी नृत्य देवदत्ता लाहिरी द्वारा, भरतनाट्यम नृत्य सोमा मंडल और कथक नृत्य श्रेयासी, खेयादास व शुजा भट्टाचार्या द्वारा प्रस्तुत किए गए। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ ठा. श्रीबांकेबिहारी के चित्रपट पर माल्यार्पण एवं अतिथियों द्वारा दीप जलाकर किया गया। हुआ। संस्थान के निदेशक डाॅ. राजीव द्विवेदी ने स्वागत भाषण दिया।
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संचालन डाॅ. ब्रजभूषण चतुर्वेदी एवं ममता गौतम ने किया। कार्यक्रम का समन्वय प्रो. ओमप्रकाश भारती ने किया। भक्तिवेदांत गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों एवं शिक्षकों ने सहभागिता की। संस्थान सचिव प्रवीण गुप्ता, रामकुमार आचार्य, अनिरुद्ध भट्टाचार्य, सुव्रत दास, माधव दास, रामकीर्तनदास, रामानंद दास, गोपालभट्ट दास, पदरेणु दास, निमाई वर्मा, अनूप आर अग्रवाल आदि लोग मौजूद थे।
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मुख्य अतिथि प्रो. डाॅ. बुद्धरश्मि मणि, महानिदेशक, राष्ट्रीय संग्रहालय एवं कुलपति, भारतीय विरासत संस्थान ने कहा कि सभी कलाओं के मूल स्रोत भगवान श्रीकृष्ण हैं। उनके बिना किसी भी कला की कल्पना करना असंभव है। कार्यक्रम अध्यक्ष स्वामी गोविंदानंद तीर्थ ने कहा धर्मशास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण 64 कलाओं में निपुण थे। विशिष्ट अतिथि अनूप कुमार गुप्ता, प्रति-कुलपति, जीएलए विवि ने बताया वृंदावन शोध संस्थान ने ब्रज संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं वह सराहनीय हैं।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत श्रीकृष्ण भजन आनंद कुमार मलिक द्वारा श्रीकृष्ण स्तुति कृति एवं रचना भट्ट द्वारा, दशावतार ओडिशी नृत्य देवदत्ता लाहिरी द्वारा, भरतनाट्यम नृत्य सोमा मंडल और कथक नृत्य श्रेयासी, खेयादास व शुजा भट्टाचार्या द्वारा प्रस्तुत किए गए। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ ठा. श्रीबांकेबिहारी के चित्रपट पर माल्यार्पण एवं अतिथियों द्वारा दीप जलाकर किया गया। हुआ। संस्थान के निदेशक डाॅ. राजीव द्विवेदी ने स्वागत भाषण दिया।
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संचालन डाॅ. ब्रजभूषण चतुर्वेदी एवं ममता गौतम ने किया। कार्यक्रम का समन्वय प्रो. ओमप्रकाश भारती ने किया। भक्तिवेदांत गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों एवं शिक्षकों ने सहभागिता की। संस्थान सचिव प्रवीण गुप्ता, रामकुमार आचार्य, अनिरुद्ध भट्टाचार्य, सुव्रत दास, माधव दास, रामकीर्तनदास, रामानंद दास, गोपालभट्ट दास, पदरेणु दास, निमाई वर्मा, अनूप आर अग्रवाल आदि लोग मौजूद थे।