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बत्ती कल्चर खत्म होने से बढ़ गई टोल पर आमदनी
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 30 Apr 2017 11:57 PM IST
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लाल बत्ती लगी कार
- फोटो : file photo
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बत्ती कल्चर खत्म होने का असर हर टोल प्लाजा पर नजर आने लगा है। पांच से दस फीसदी की आय अधिकांश जगह बढ़ गई है। टोल से बचने के लिए गाड़ियों में बत्ती रखकर चलने का जुगाड़ भी अब खत्म हो गया है। टोल कंपनियों के अफसरों से मिली जानकारी के मुताबिक यमुना एक्सप्रेसवे पर ही हर रोज बत्ती लगीं 600 गाड़ियां निकलती थीं जबकि दिल्ली-आगरा हाईवे पर भी हर रोज का औसत करीब 200 गाड़ियों का था। अब इतने लोग तो बत्ती के लिए अधिकृत होंगे नहीं। जाहिर सी बात है कि तमाम लोग टोल को ‘गोल’ करने के लिए भी अवैध रूप से बत्ती का प्रयोग करते होंगे।
क्रेंद की मोदी सरकार ने देशभर में लाल बच्ची का कल्चर खत्म कर दिया है। एक मई से देश में कोई भी लाल बत्ती का प्रयोग अपनी गाड़ियों पर नहीं कर पाएगा। केंद्र सरकार की इस पहल पर उत्तर प्रदेश में अधिकारियों ने भी अपनी गाड़ियों से नीली बत्ती उतार फेंकी है। बस कुछ जरूरी सेवाओं से जुड़े अफसर ही प्रयोग कर रहे हैं।
अब लाल और नीली बत्ती लगी गाड़ियां आमतौर पर दिखती नहीं। बत्ती कल्चर खत्म होने का सबसे बड़ा असर टोल प्लाजा पर पड़ा है। लाल और नीली बत्ती लगाकर हर रोज हजारों गाड़ियां बगैर टैक्स दिए ही गुजर जाती थीं लेकिन अब यह टैक्स दे रहे हैं। टोल प्लाजा की बढ़ती आमदनी से तो यही साफ हो रहा है।
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यमुना एक्सप्रेसवे के नोडल अधिकारी अनिल चौहान का कहना है कि आमदनी तो बढ़ी है लेकिन कोई बहुत असर नहीं पड़ा है। हाईवे पर टोल कंपनी के क्षेत्रीय प्रभारी वैभव शर्मा का कहना है कि बत्ती लगी गाड़ियों की संख्या बहुत थी। अब कौन बत्ती के लिए अधिकृत है और कौन नहीं ये तो टोल वाले नहीं पूछ सकते थे।
टोल से बचने को लगा रहे थे बत्ती
मोटर वाहन कानून में बत्ती का प्रयोग करने वालों की बाकायदा लिस्ट बनी हुई थी। लेकिन तमाम अधिकारी ऐसे थे जो बत्ती का प्रयोग नहीं कर सकते लेकिन फिर भी कर रहे थे। यमुना एक्सप्रेसवे और हाईवे पर ही पिछले एक साल में करीब 45 अधिकारियों की गाड़ियों से बत्ती को उतारा गया। अफसरों के रिश्तेदार भी बत्ती का प्रयोग कर रहे थे। रिटायर्ड सीएमओ, एसडीएम और सीओ की गाड़ी से चेकिंग में नीली बत्ती उतारी गई थी।
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क्रेंद की मोदी सरकार ने देशभर में लाल बच्ची का कल्चर खत्म कर दिया है। एक मई से देश में कोई भी लाल बत्ती का प्रयोग अपनी गाड़ियों पर नहीं कर पाएगा। केंद्र सरकार की इस पहल पर उत्तर प्रदेश में अधिकारियों ने भी अपनी गाड़ियों से नीली बत्ती उतार फेंकी है। बस कुछ जरूरी सेवाओं से जुड़े अफसर ही प्रयोग कर रहे हैं।
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अब लाल और नीली बत्ती लगी गाड़ियां आमतौर पर दिखती नहीं। बत्ती कल्चर खत्म होने का सबसे बड़ा असर टोल प्लाजा पर पड़ा है। लाल और नीली बत्ती लगाकर हर रोज हजारों गाड़ियां बगैर टैक्स दिए ही गुजर जाती थीं लेकिन अब यह टैक्स दे रहे हैं। टोल प्लाजा की बढ़ती आमदनी से तो यही साफ हो रहा है।
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यमुना एक्सप्रेसवे के नोडल अधिकारी अनिल चौहान का कहना है कि आमदनी तो बढ़ी है लेकिन कोई बहुत असर नहीं पड़ा है। हाईवे पर टोल कंपनी के क्षेत्रीय प्रभारी वैभव शर्मा का कहना है कि बत्ती लगी गाड़ियों की संख्या बहुत थी। अब कौन बत्ती के लिए अधिकृत है और कौन नहीं ये तो टोल वाले नहीं पूछ सकते थे।
टोल से बचने को लगा रहे थे बत्ती
मोटर वाहन कानून में बत्ती का प्रयोग करने वालों की बाकायदा लिस्ट बनी हुई थी। लेकिन तमाम अधिकारी ऐसे थे जो बत्ती का प्रयोग नहीं कर सकते लेकिन फिर भी कर रहे थे। यमुना एक्सप्रेसवे और हाईवे पर ही पिछले एक साल में करीब 45 अधिकारियों की गाड़ियों से बत्ती को उतारा गया। अफसरों के रिश्तेदार भी बत्ती का प्रयोग कर रहे थे। रिटायर्ड सीएमओ, एसडीएम और सीओ की गाड़ी से चेकिंग में नीली बत्ती उतारी गई थी।