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Mathura News: मामा क हत्यारे भांजे को आजीवन कारावास
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मथुरा। कोर्ट से जमानत वापस लेने पर मामा की गोली मारकर हत्या करने वाले भांजे को सत्र न्यायाधीश/ फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय सुशील कुमार पंचम ने सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
हाईवे थाना क्षेत्र के पालीखेड़ा निवासी गुड़िया ने 5 मार्च 2020 को शहर कोतवाली में अपने भांजे स्वामी घाट निवासी सतीश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी में बताया कि उनका भांजा सतीश आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। एक केस के मामले में उनके पति रामकुमार ने अपने प्लॉट के कागजात कोर्ट में जमा कर सतीश की जमानत दी थी। कुछ समय बाद पति को प्लॉट बेचने की आवश्यकता पड़ गई। इस पर पति रामकुमार ने भांजे सतीश को जमानत वापस लेने के बारे में जानकारी दी। इससे वह आक्रोशित हो गया। 5 मार्च 2020 को षड्यंत्र के तहत सतीश ने रामकुमार को अपने घर बुलाया।
यहां बातचीत के दौरान सतीश आक्रोशित हो गया और तमंचे से रामकुमार को गोली मार दी। गोली रामकुमार के सिर में लगी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मामा की हत्या के बाद सतीश उनकी बाइक को लेकर भाग गया। करीब दो माह बाद 10 मई 2026 को पुलिस ने सतीश को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। यहां से उसे जेल भेज दिया। कुछ समय बाद उसे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। मामले की सुनवाई सत्र न्यायाधीश/ फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय सुशील कुमार पंचम के यहां हुई। सुनवाई के दौरान एडीजीसी क्राइम की दलील, मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाह समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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हाईवे थाना क्षेत्र के पालीखेड़ा निवासी गुड़िया ने 5 मार्च 2020 को शहर कोतवाली में अपने भांजे स्वामी घाट निवासी सतीश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी में बताया कि उनका भांजा सतीश आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। एक केस के मामले में उनके पति रामकुमार ने अपने प्लॉट के कागजात कोर्ट में जमा कर सतीश की जमानत दी थी। कुछ समय बाद पति को प्लॉट बेचने की आवश्यकता पड़ गई। इस पर पति रामकुमार ने भांजे सतीश को जमानत वापस लेने के बारे में जानकारी दी। इससे वह आक्रोशित हो गया। 5 मार्च 2020 को षड्यंत्र के तहत सतीश ने रामकुमार को अपने घर बुलाया।
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यहां बातचीत के दौरान सतीश आक्रोशित हो गया और तमंचे से रामकुमार को गोली मार दी। गोली रामकुमार के सिर में लगी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मामा की हत्या के बाद सतीश उनकी बाइक को लेकर भाग गया। करीब दो माह बाद 10 मई 2026 को पुलिस ने सतीश को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। यहां से उसे जेल भेज दिया। कुछ समय बाद उसे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। मामले की सुनवाई सत्र न्यायाधीश/ फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय सुशील कुमार पंचम के यहां हुई। सुनवाई के दौरान एडीजीसी क्राइम की दलील, मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाह समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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