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...धन्य खिलारी खेल फाग रंग लाठी ढाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Mar 2017 12:06 AM IST
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लठामार होली
- फोटो : अमर उजाला
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ब्रज की रंगीली होली में बरजोरी का भी अपना ही आनंद है। एक दिन पहले जो रंग नंदगांव के हुरियारे बरसाना की रंगीली गली में जमाकर आते हैं, दूसरे दिन रंग का वही खेल दिखाई देता है नंदगांव में। बरसाना की लठामार होली के बाद नंदगांव की लठामार होली भी राधा-कृष्ण की अलौकिक लीला का अगला चरण है।
यह लीला बरसाना की रंगीली गली से ही अगले दिन शुरू होती है। राधारानी के बुलावे पर कान्हा रूप नंदगांव के हुरियारे बरसाना की हुरियारिनों संग सोमवार को लठामार होली खेल कर आए थे। रंगों के इस खेल में जीत तो हालांकि लाड़ली-लाड़ले के अलौकिक प्रेम की हुई लेकिन फिर भी कोई खुद को एक दूसरे से कम आंकने का तैयार हुआ और फिर नंदगांव में हुई लठामार होली।
मंगलवार को दोपहर में करीब ढाई बजे बरसाना के हुरियारे राधारानी स्वरूप पताका के साथ यशोदा कुंड पहुंचे। यहां हुरियारों ने भांग ठंडाई छानी। यहीं होली की तैयारी की गई। इसके बाद हुरियारे भूरे का थोक होते हुए नंदबाबा के पहाड़ी स्थित भवन पर झुंडों में हंसी-ठिठोली करते पहुंचने लगे। रास्ते में उन पर नंदगांव के गोप ग्वालों ने जमकर रंग बरसाया। इधर नंदगांव की रंगीली गली और लठामार होली चौक में हुरियारिन सज धज कर हाथ में लाठी लिए हुरियारों का इंतजार कर ही रही थीं।
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नंदभवन से हुरियारे गोपियों से हंसी ठिठोली करते हुए रंगीली गली से निकले। लठामार होली चौक पर सबके एकत्र होने के बाद समाज का इशारा मिलते ही हुरियारिनों ने जम कर हुरियारों पर लाठियां बरसाईं। हुरियारे भी हुरियारिनों को चिढ़ाते जा रहे थे और लठ की मार भी झेल रहे थे। सांझ होते ही समाज का आदेश हुआ कि सूर्यदेव छिप गए हैं, लठामार बंद की जाए। इसके बाद बरसाना के हुरियारे गोपी स्वरूप महिलाओं के चरण स्पर्श कर बरसाने चले गए।
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यह लीला बरसाना की रंगीली गली से ही अगले दिन शुरू होती है। राधारानी के बुलावे पर कान्हा रूप नंदगांव के हुरियारे बरसाना की हुरियारिनों संग सोमवार को लठामार होली खेल कर आए थे। रंगों के इस खेल में जीत तो हालांकि लाड़ली-लाड़ले के अलौकिक प्रेम की हुई लेकिन फिर भी कोई खुद को एक दूसरे से कम आंकने का तैयार हुआ और फिर नंदगांव में हुई लठामार होली।
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मंगलवार को दोपहर में करीब ढाई बजे बरसाना के हुरियारे राधारानी स्वरूप पताका के साथ यशोदा कुंड पहुंचे। यहां हुरियारों ने भांग ठंडाई छानी। यहीं होली की तैयारी की गई। इसके बाद हुरियारे भूरे का थोक होते हुए नंदबाबा के पहाड़ी स्थित भवन पर झुंडों में हंसी-ठिठोली करते पहुंचने लगे। रास्ते में उन पर नंदगांव के गोप ग्वालों ने जमकर रंग बरसाया। इधर नंदगांव की रंगीली गली और लठामार होली चौक में हुरियारिन सज धज कर हाथ में लाठी लिए हुरियारों का इंतजार कर ही रही थीं।
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नंदभवन से हुरियारे गोपियों से हंसी ठिठोली करते हुए रंगीली गली से निकले। लठामार होली चौक पर सबके एकत्र होने के बाद समाज का इशारा मिलते ही हुरियारिनों ने जम कर हुरियारों पर लाठियां बरसाईं। हुरियारे भी हुरियारिनों को चिढ़ाते जा रहे थे और लठ की मार भी झेल रहे थे। सांझ होते ही समाज का आदेश हुआ कि सूर्यदेव छिप गए हैं, लठामार बंद की जाए। इसके बाद बरसाना के हुरियारे गोपी स्वरूप महिलाओं के चरण स्पर्श कर बरसाने चले गए।