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भाव और भक्ति की लाठियों से बरसा आनंद का रंग

Tue, 07 Mar 2017 12:34 AM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Tue, 07 Mar 2017 12:34 AM IST
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lathamar holi in barsana of mathura
हुरियारिनों ने एक घंटे तक बरसाईं प्रेम पगीं लाठियां - फोटो : Amar Ujala
राधारानी की नगरी बरसाना सोमवार को भाव और भक्ति के अनूठे रंगों में सराबोर रही। एक ओर नंदगांव के हुरियारे ढाल लेकर बरसाना पहुंचे तो दूसरी ओर बरसाना की हुरियारिनें लाठियां लेकर रंगीली गली में तैयार थीं। होली के गीतों की गूंज बीच शुरुआत हुई लठामार होली की। इस समय रंगीली गली में हर हुरियारा कृष्ण और उनके सखा ग्वालबालों का रूप तो हर हुरियारिन राधारानी और उनकी सखियों का रूप लिए थी। ढाल पर लठों की चोट पड़ते ही लाड़ले-लाड़ली की जय-जयकार गूंज उठती। आनंद इतना था कि देश और विदेश से करीब चार लाख श्रद्धालु इस लीला के साक्षी बनने बरसाना पहुंचे।  
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सोमवार की सुबह से ही बरसाना के हर घर में उत्सव शुरू हो गया। गली-गली में बस यही चर्चा रही कि नंदगांव से हुरियारों की टोली कब आने वाली है। बरसाना की हुरियारिन अपने प्रेम पगे लठों के साथ होली खेलने को तैयार थीं। श्रीजी मंदिर में भी सुबह से ही गुलाल के बदरा दिखाई देने लगे। दोपहर को जैसे ही नंदगांव के हुरियारों की टोली बरसाना पहुंची तो उल्लास छा गया।
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साढ़े तीन बजे से ही रंगीली गली में भीड़ का छोर नहीं दिखा। चार बजे लठामार होली की शुरुआत हुई और हर ओर आनंद का रंग बरसने लगा। अब हुरियारिनें हुरियारों पर लठ बरसातीं तो हुरियारे यह कहकर उन्हें चिढ़ाते कि ‘और तेज’। ज्यूं ही हंसी-ठिठोली बढ़ती तो हुरियारिनों के लठों का वेग और बढ़ जाता। ऐसे में उम्र के बंधन भी पीछे छूट गए। कोई हुरियारिन बाल रूप हुरियारे पर लठ बरसा रही थी तो हुरियारे भी अपने से उम्र में छोटी हुरियारिनों से हंसी ठिठोली में पीछे नहीं रहे।
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ठीक पांच बजे अलौकिक प्रेम के भाव और भक्ति का आनंद अपने चरम पर पहुंच कर पूर्ण हुआ। इस लीला को देखने देश के तो अलग-अलग शहरों के अलावा विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए। प्रशासन के अनुसार भीड़ चार लाख से ज्यादा रही। लठामार होली शुरू होने के बाद तो जो जहां था वहीं रह गया। ऐसे में पुलिस और प्रशासन को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। तमाम लोग बरसाना के रास्ते में रात तक फंसे रहे।
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