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...सियासी लोग कभी किसी का भला नहीं करते
अमर उजाला वृंदावन
Updated Sun, 11 Sep 2016 12:20 AM IST
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कवियों की महफिल
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव में शुक्रवार देर रात तक श्रोता सूफी गायन और कवि सम्मेलन का आनंद लेते रहे। आयोजन में सूफी गायिका डा. ममता जोशी ने ताल छेड़ी जो देर रात तक चलती रही। इसके बाद कवि सम्मेलन हुआ।
कवियों ने बदलते रस के साथ काव्य पाठ कर उपस्थित श्रोताओं का मनोरंजन किया। सबसे पहले वीर रस के कवि मनवीर मधुर ने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए पढ़ा कि ‘जुबां से काम करते हैं, दिल से दुआ नहीं करते हैं, सियासी लोग कभी किसी का भला नहीं करते’। कानपुर से आए प्रमोद तिवारी ने ‘लिख-लिख पढ़-पढ़ झूमे बिना नाम की चिठ्ठी...’ पंक्तियां पढ़ीं।
गाजियाबाद से आईं अंजुम रहबर ने ‘मेरी पसंद और थी और सबकी पसंद और, इतनी जरा सी बात पर घर छोड़ना पड़ा। दिल तोड़ना कठिन था पर दिल तोड़ना पड़ा।’ सुनाकर वाहवाही लूटी। जयपुर से आए संपत सरल ने ‘याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन, दस पैसे में दो चूरन की पुड़ियों वाले दिन’ गीत सुनाया तो लोगों बचपन की याद कर भावुक हो गए।
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अंत में संचालन कर रहे डा. कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं से लोगों की खूब तालियां बटोरीं।
‘कोई दिवाना कहता है..., इतनी रंग बिरंगी दुनिया दोे आंखों में कैसे आए... गीत सुनकर लोग आनंदित हो गए। इसके बाद लोगों को पसंदीदा शेर भी सुनाए। बीच-बीच में वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष से भी कुमार विश्वास लोगों को गुदगुदाते रहे। कार्यक्रम में विधायक प्रदीप माथुर, समिति सचिव गोपी गोस्वामी, अभय वशिष्ठ, समाजसेवी पवन चतुर्वेदी, डा. आदित्य वाजपेयी आदि उपस्थित थे।
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कवियों ने बदलते रस के साथ काव्य पाठ कर उपस्थित श्रोताओं का मनोरंजन किया। सबसे पहले वीर रस के कवि मनवीर मधुर ने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए पढ़ा कि ‘जुबां से काम करते हैं, दिल से दुआ नहीं करते हैं, सियासी लोग कभी किसी का भला नहीं करते’। कानपुर से आए प्रमोद तिवारी ने ‘लिख-लिख पढ़-पढ़ झूमे बिना नाम की चिठ्ठी...’ पंक्तियां पढ़ीं।
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गाजियाबाद से आईं अंजुम रहबर ने ‘मेरी पसंद और थी और सबकी पसंद और, इतनी जरा सी बात पर घर छोड़ना पड़ा। दिल तोड़ना कठिन था पर दिल तोड़ना पड़ा।’ सुनाकर वाहवाही लूटी। जयपुर से आए संपत सरल ने ‘याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन, दस पैसे में दो चूरन की पुड़ियों वाले दिन’ गीत सुनाया तो लोगों बचपन की याद कर भावुक हो गए।
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अंत में संचालन कर रहे डा. कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं से लोगों की खूब तालियां बटोरीं।
‘कोई दिवाना कहता है..., इतनी रंग बिरंगी दुनिया दोे आंखों में कैसे आए... गीत सुनकर लोग आनंदित हो गए। इसके बाद लोगों को पसंदीदा शेर भी सुनाए। बीच-बीच में वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष से भी कुमार विश्वास लोगों को गुदगुदाते रहे। कार्यक्रम में विधायक प्रदीप माथुर, समिति सचिव गोपी गोस्वामी, अभय वशिष्ठ, समाजसेवी पवन चतुर्वेदी, डा. आदित्य वाजपेयी आदि उपस्थित थे।