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एबीसीडी के चक्कर में क ख ग भी भूल गए
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वृंदावन। किशोरपुरा स्थित खट्टर भवन में राष्ट्र चेतना मंच के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़े के तहत ‘हिंदी के रंग-कविता के संग’ काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ ब्रिजेंद्र शर्मा की वाणी वंदना से हुआ। हिंदी वंदना करते हुए डॉ. उमाशंकर राही ने कहा कि मैकाले की शिक्षा पाकर, मद में इतने फूल गए। एबीसीडी के चक्कर में क ख ग भी भूल गए।
श्रीकांत तिवारी ने कहा हमारी आन वान शान, कैसे हो हिंदी का उत्थान संभल विचार करें, जय हिंदी, हिंदू जय हिंदुस्तान। अध्यक्षता कर रहे मोहनलाल मोही ने कहा सावन राखी दिवारी की ज्योति, फागुन में पिचकारी सी हिंदी। ग्यारस को उपवास अमावस पूनम की उजियारी सी हिंदी। प्रदीप पुंज ने कहा कि जिंदगी के दो राहे पर जब इंसान खड़ा होता है। तभी इंसान के फैसला लेने का इम्तिहान कड़ा होता है।
ब्रह्मकुमारी शर्मा ने अलहदा व्यक्तित्व लिए बेफिक्र हवा के जैसे उलझन में बालों में दुनिया घूमना चाहती हैं। ब्रज किशोर त्रिपाठी ने कहा कि राह हमारी हिंदी रही है, हम राही हैं हिंदी के, मरना मिटना इतना आगे बढ़ना सीख मिली है हिंदी से। युवा कवि सूरज मिश्रा ने कहा हिंदी हम सफर मेरा, उम्र भर गुनगुनाएंगे, सेवा हम हिंदी की करते उसे कुछ यू रिझाएंगे। इस अवसर पर आनंद प्रकाश द्विवेदी, महिमा, मदन मिश्रा, सीता, गौरव कुमार, धर्मेंद्र सिंह मौजूद रहे। संचालन बृजेंद्र शर्मा ने किया।
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श्रीकांत तिवारी ने कहा हमारी आन वान शान, कैसे हो हिंदी का उत्थान संभल विचार करें, जय हिंदी, हिंदू जय हिंदुस्तान। अध्यक्षता कर रहे मोहनलाल मोही ने कहा सावन राखी दिवारी की ज्योति, फागुन में पिचकारी सी हिंदी। ग्यारस को उपवास अमावस पूनम की उजियारी सी हिंदी। प्रदीप पुंज ने कहा कि जिंदगी के दो राहे पर जब इंसान खड़ा होता है। तभी इंसान के फैसला लेने का इम्तिहान कड़ा होता है।
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ब्रह्मकुमारी शर्मा ने अलहदा व्यक्तित्व लिए बेफिक्र हवा के जैसे उलझन में बालों में दुनिया घूमना चाहती हैं। ब्रज किशोर त्रिपाठी ने कहा कि राह हमारी हिंदी रही है, हम राही हैं हिंदी के, मरना मिटना इतना आगे बढ़ना सीख मिली है हिंदी से। युवा कवि सूरज मिश्रा ने कहा हिंदी हम सफर मेरा, उम्र भर गुनगुनाएंगे, सेवा हम हिंदी की करते उसे कुछ यू रिझाएंगे। इस अवसर पर आनंद प्रकाश द्विवेदी, महिमा, मदन मिश्रा, सीता, गौरव कुमार, धर्मेंद्र सिंह मौजूद रहे। संचालन बृजेंद्र शर्मा ने किया।
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