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महाकुंभ 2025: महामंडलेश्वर बनीं कंगना किन्नर, अभिनेत्री ममता कुलकर्णी संग किया पिंडदान; संन्यास पर कही ये बात

Sat, 25 Jan 2025 07:47 PM IST
अरुन पाराशर संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अरुन पाराशर Updated Sat, 25 Jan 2025 07:47 PM IST
सार

35 साल की कंगना 20 साल की उम्र से संतों के सानिध्य में हैं। वह मूलरूप से नाैहझील बाजना की रहने वाली हैं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है। 

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Kangana Kinnar of Vrindavan became Mahamandleshwar in Prayagraj MahaKumbh
कंगना किन्नर बनीं महामंडलेश्वर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

प्रयागराज महाकुंभ में वृंदावन की 35 साल की किन्नर को महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई। अंतरराष्ट्रीय जूना किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने उन्हें फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के साथ अपना पिंड दान करने के बाद त्रिवेणी संगम में स्नान के बाद पट्टाभिषेक किया।
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नया नाम भी दिया गया
वृंदावन के किन्नर समाज की अध्यक्ष कंगना किन्नर ने किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर  लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के सानिध्य में 21 जनवरी को अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के साथ त्रिवेणी संगम में अपना पिंडदान किया। संन्यासी परंपरा के अनुसार अपना पुराना जीवन त्यागकर संन्यासी जीवन अपनाया। संत, महंत और महामंडलेश्वरों के सानिध्य में संगम तट पर कंगना किन्नर का पट्टाभिषेक किया गया और उन्हें महामंडलेश्वर मां कृष्णानंद गिरि नाम दिया गया।
 
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15 साल से संतों के सानिध्य में 
कंगना किन्नर से महामंडलेश्वर मां कृष्णानंद गिरि बनने के बाद उन्होंने बताया कि वह मूलरूप से नौहझील बाजना की रहने वाली हैं। पिछले 15 साल से वह संतों के सानिध्य में हैं। शुरुआती जीवन से ही वह दान, पुण्य भजन, साधना में उनकी रुची रही है।

 
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उन्होंने बताया कि दो साल पहले ही उन्होंने वृंदावन के राजपुर बांगर में वृंदाधाम आश्रम की स्थापना की। इसमें महादेव मंदिर का निर्माण कराया था। इससे पहले वह पानीगांव में रहती थीं। उन्होंने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद वह किन्नर होने पर संत समाज के संपर्क में आर्इं। वह तीन फरवरी को शाही स्नान के बाद वृंदावन स्थित अपने आश्रम में आएंगी। कुछ दिन के बाद वह फिर महाकुंभ के पूर्ण होने तक वहीं प्रवास करेंगी।


 
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