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जुबेदा को भी ‘बजरंगी भाईजान’ का इंतजार
अजय खंडेलवाल
Updated Sat, 04 Mar 2017 10:42 PM IST
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जुबेदा
- फोटो : अमर उजाला
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जुबेदा को एक बजरंगी भाईजान की जरूरत है जो उसे उसके घर पहुंचा दे, परिजनों से मिला दे। घर नसीब न हो तो कम से कम ऐसी महफूज जगह तक तो पहुंचा दे जहां वो सही सलामत रहे।
करीब 20 वर्षीय जुबेदा इस दुनियादारी से अनजान है। रेलवे स्टेशन के पास लावारिस अवस्था में मिली तो पुलिस ने करीब एक माह पहले जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। यहां उसका उपचार किया गया। जुबेदा अल्लाह की इबादत करती है, नमाज पढ़ती है और बस अपना नाम ही ले पाती है। जब उससे उसके घर का पता पूछते हैं तो वह नहीं बता पाती।
यहां इसका इलाज पूरा हो गया तो 25 फरवरी को अस्पताल प्रशासन ने जुबेदा को नारी निकेतन भेजा। यहां जगह न होने के चलते उसे लौटा दिया गया। अगले दिन फिर ऐसा ही हुआ तो हारकर अस्पताल प्रशासन ने जुबेदा को फिर से अस्पताल में भर्ती कर लिया है।
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सुरक्षा की सता रही है चिंता
जुबेदा दुनियादारी से अनजान है, वो कभी भी वार्ड से बाहर निकल आती है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन को उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता भी सता रही है। चिंता ये भी है कि वह अस्पताल परिसर से बाहर निकल गई तो उसके साथ कोई घटना भी हो सकती है। सुरक्षा के लिए चिकित्सक कई बार शहर कोतवाल, नगर मजिस्ट्रेट, जिला प्रोबेशन अधिकारी, होमगार्ड कमांडेट को लिख चुके हैं। लेकिन अभी तक अफसरों ने इसका संज्ञान नहीं लिया है।
जुबेदा अब पूरी तरह से स्वस्थ्य है। हमने दो बार उसे नारी निकेतन भेजा लेकिन वहां जगह न होने के चलते उसे लौटा दिया गया। हमारी चिंता उसकी सुरक्षा को लेकर है। वो बस अपना नाम ही बोल पाती है।
- डा. अनूप अंबेश, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल मथुरा
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करीब 20 वर्षीय जुबेदा इस दुनियादारी से अनजान है। रेलवे स्टेशन के पास लावारिस अवस्था में मिली तो पुलिस ने करीब एक माह पहले जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। यहां उसका उपचार किया गया। जुबेदा अल्लाह की इबादत करती है, नमाज पढ़ती है और बस अपना नाम ही ले पाती है। जब उससे उसके घर का पता पूछते हैं तो वह नहीं बता पाती।
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यहां इसका इलाज पूरा हो गया तो 25 फरवरी को अस्पताल प्रशासन ने जुबेदा को नारी निकेतन भेजा। यहां जगह न होने के चलते उसे लौटा दिया गया। अगले दिन फिर ऐसा ही हुआ तो हारकर अस्पताल प्रशासन ने जुबेदा को फिर से अस्पताल में भर्ती कर लिया है।
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सुरक्षा की सता रही है चिंता
जुबेदा दुनियादारी से अनजान है, वो कभी भी वार्ड से बाहर निकल आती है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन को उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता भी सता रही है। चिंता ये भी है कि वह अस्पताल परिसर से बाहर निकल गई तो उसके साथ कोई घटना भी हो सकती है। सुरक्षा के लिए चिकित्सक कई बार शहर कोतवाल, नगर मजिस्ट्रेट, जिला प्रोबेशन अधिकारी, होमगार्ड कमांडेट को लिख चुके हैं। लेकिन अभी तक अफसरों ने इसका संज्ञान नहीं लिया है।
जुबेदा अब पूरी तरह से स्वस्थ्य है। हमने दो बार उसे नारी निकेतन भेजा लेकिन वहां जगह न होने के चलते उसे लौटा दिया गया। हमारी चिंता उसकी सुरक्षा को लेकर है। वो बस अपना नाम ही बोल पाती है।
- डा. अनूप अंबेश, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल मथुरा