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Mathura News: सर्दी की शुरुआत के साथ बढ़ी जोड़ों में दर्द की समस्या
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मथुरा। सर्दियों की दस्तक के साथ ही जोड़ों में दर्द की समस्या तेजी से बढ़ने लगी है। मौसम में ठंडक बढ़ते ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है । खासतौर पर युवा और बुजुर्ग जोड़ों के दर्द और अकड़न की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
मौसम में अचानक बदलाव का सबसे पहला असर हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है, इसलिए सतर्क रहना ही बेहतर है। साथ ही जिन लोगों को पहले से गठिया या पुरानी चोट की समस्या है। उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जिला अस्पताल में सुबह के समय ओपीडी में अर्थराइटिस, ऑस्टियोअर्थराइटिस, पुरानी चोटों और विटामिन की कमी से जूझ रहे लोगों की लंबी लाइन लग रही है। जिला अस्पताल के सीएमएस और अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि ठंड के कारण रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे जोड़ों और मांसपेशियों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है। कम रक्त प्रवाह और गर्माहट की कमी के कारण जोड़ों और मांसपेशियों में जकड़न बढ़ जाती है।
इससे घुटने, कमर, कंधे और कोहनी के जोड़ प्रभावित होते हैं। सुबह के समय दर्द और कठोरता अधिक रहती है। इससे मरीजों को चलने-फिरने में परेशानी होती है। सर्दियों में पुरानी चोट, गठिया, ऑस्टियो अर्थराइटिस, रूमेटाइड अर्थराइटिस की समस्या भी बढ़ जाती है। इससे बुजुर्गों को ज्यादा दर्द होता है। युवाओं में विटामिन डी या कैल्शियम की कमी होने पर दर्द की समस्या होती है। ऐसे में लोगों को खानपान के साथ दिनचर्या में भी बदलाव करना होगा।
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लोगों को सर्द मौसम में ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचाना चाहिए। इसके साथ ही बिना सलाह के दर्द निवारक दवा नहीं लेनी चाहिए। यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो या सूजन दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके बाद ही दवा का सेवन करना चाहिए।
- गर्म कपड़े पहनें, ठंडी हवा से जोड़ों को बचाए
- शरीर को लंबे समय तक ठंड के संपर्क में आने से बचाएं
- नियमित रूप से हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग करें
- धूप में बैठकर शरीर की सिकाई करें
- पर्याप्त पानी का सेवन करें
- शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी न आने दें
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मौसम में अचानक बदलाव का सबसे पहला असर हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है, इसलिए सतर्क रहना ही बेहतर है। साथ ही जिन लोगों को पहले से गठिया या पुरानी चोट की समस्या है। उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जिला अस्पताल में सुबह के समय ओपीडी में अर्थराइटिस, ऑस्टियोअर्थराइटिस, पुरानी चोटों और विटामिन की कमी से जूझ रहे लोगों की लंबी लाइन लग रही है। जिला अस्पताल के सीएमएस और अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि ठंड के कारण रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे जोड़ों और मांसपेशियों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है। कम रक्त प्रवाह और गर्माहट की कमी के कारण जोड़ों और मांसपेशियों में जकड़न बढ़ जाती है।
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इससे घुटने, कमर, कंधे और कोहनी के जोड़ प्रभावित होते हैं। सुबह के समय दर्द और कठोरता अधिक रहती है। इससे मरीजों को चलने-फिरने में परेशानी होती है। सर्दियों में पुरानी चोट, गठिया, ऑस्टियो अर्थराइटिस, रूमेटाइड अर्थराइटिस की समस्या भी बढ़ जाती है। इससे बुजुर्गों को ज्यादा दर्द होता है। युवाओं में विटामिन डी या कैल्शियम की कमी होने पर दर्द की समस्या होती है। ऐसे में लोगों को खानपान के साथ दिनचर्या में भी बदलाव करना होगा।
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लोगों को सर्द मौसम में ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचाना चाहिए। इसके साथ ही बिना सलाह के दर्द निवारक दवा नहीं लेनी चाहिए। यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो या सूजन दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके बाद ही दवा का सेवन करना चाहिए।
- गर्म कपड़े पहनें, ठंडी हवा से जोड़ों को बचाए
- शरीर को लंबे समय तक ठंड के संपर्क में आने से बचाएं
- नियमित रूप से हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग करें
- धूप में बैठकर शरीर की सिकाई करें
- पर्याप्त पानी का सेवन करें
- शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी न आने दें