{"_id":"49e8b80a7f3bcdc58f1ae0d773a1b6e3","slug":"janmashtmi-prepration-in-shreekrishna-janmasthan-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बार ‘चंद्रकी’ पोशाक धारण करेंगे ठाकुरजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बार ‘चंद्रकी’ पोशाक धारण करेंगे ठाकुरजी
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Sat, 29 Aug 2015 11:22 PM IST
विज्ञापन
भगवान श्रीकृष्ण की प्राकट्य भूमि मथुरा एक बार फिर पूर्णावतार, रसावतार, प्रेमावतार श्रीकृष्ण के जन्म महोत्सव के लिए सज रही है। शास्त्रीय मर्यादाओं और परंपराओं के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के अवसर पर पांच सितंबर को यह उत्सव मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। हर बार की तरह इस बार भी भव्य आयोजन होने वाला है।
मथुरापुरी की महिमा श्रीमद्भागवत, महाभारत, गर्ग संहिता, अठारह पुराण सहित अनेक ग्रंथों और अभिलेखों में वर्णित है। भगवान विष्णु ने द्वापर युग में यहां श्रीकृष्ण रूप में अवतार लिया। पूरा ब्रज क्षेत्र राधा-कृष्ण की लीलाओं का बोध कराता है। भगवान के जन्म महोत्सव के बारे में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि जन्मस्थान के संपूर्ण परिसर को कलात्मक रूप से सजाया जा रहा है।
अवसर की महत्ता, जन्मस्थान की गरिमा और भक्तों की भावनाओं के अनुरूप नयनाभिराम साज सज्जा देखकर श्रद्धालु अभिभूत हो उठेंगे। संपूर्ण प्रांगण, भवनों और देवालय को ब्रज के भावुक भक्त सज्जाकार और पश्चिम बंगाल के कारीगर नयनाभिराम स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। मंदिर के संपूर्ण शिखर, गुंबद, तिवारियों, खिड़कियों, झरोखों, द्वार, गलियारों को अत्यंत सुंदर और कलात्मक रूप में सुसज्जित किया जा रहा है। श्रद्धालु जन्मस्थान को अंदर या बाहर जिस दिशा से भी निहारेंगे वह दर्शन अनुपम होंगे।
विज्ञापन
जन्मस्थान परिसर में ही स्थित श्रीकेशवदेव मंदिर में विविध प्रकार के पुष्प, पत्र और वस्त्रों से निर्मित भव्य बंगले में ठाकुरजी विराजमान होंगे। मंदिर के प्राचीन वास्तु के अनुरूप गर्भगृह के भीतरी भाग को सजाया जाएगा। पीले गोटे, पुष्प, रत्न प्रतिकृति के अद्भुत संयोजन से गर्भगृह को मूल स्वरूप में बिना कोई परिवर्तन किए दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा। बाहरी हिस्से में उत्कीर्ण भगवान के जन्म से पूर्व की लीलाएं भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहती हैं। इन स्थानों पर प्रकाश की विशेष व्यवस्था रहेगी।
भागवत भवन मंदिर के द्वार को जहां मंगल चिन्ह, उत्कीर्ण साज-सज्जा से सजाया जाएगा। विशाल जगमोहन को सुंदर पुष्प, घंटाकृति और अन्य मंगल चिन्हों से भव्य रूप दिया जा रहा है। ठाकुरजी के मुख्य श्रीविग्रह के समीप पुष्प सज्जा और पिछवाई दक्षिण भारतीय शैली के अनुरूप होगी। इस अवसर पर ठाकुरजी रेशम, जरी, सिल्क और रत्न प्रतिकृति के सुंदर संयोजन से बनी ‘चंद्रकी’ पोशाक धारण करेंगे। इस मौके पर संस्थान के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, संयुक्त मुख्य अधिशासी राजीव श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह, रणधीर कुमार सिंह, अनुराग पाठक, संजीव भारद्वाज आदि उपस्थित थे।
जन्मस्थान पर कार्यक्रम (5 सितंबर)
- प्रात:काल में दिव्य शहनाई और नगाड़ों के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन, इसके बाद पंचामृत अभिषेक, भगवान के पवित्र स्त्रोतों का पाठ और पुष्पार्चन
- सुबह 10:00 बजे श्रीकृष्णजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास महाराज और गुरु शरणानंद महाराज के सानिध्य में लीलामंच पर दिव्य पुष्पांजलि कार्यक्रम
- रात्रि 11:00 बजे श्रीगणेश-नवग्रह आदि पूजन से मुख्य कार्यक्रम आरंभ
- मध्य रात्रि 12:00 बजे से 12:10 तक भगवान के प्राकट्य के दर्शन। इसके बाद केसर आदि सुगंधित द्रव्यों से लिपटे हुए भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह अभिषेक स्थल पर पधारेंगे। श्रीविग्रह का दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि सामग्रियों से दिव्य महाअभिषेक
- 12:40 से 12:50 तक शृंगार आरती
- रात्रि 1:30 बजे तक हाेंगे जन्म के दर्शन
नंदबाबा मंदिर में छह को जन्माष्टमी
प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार छह सितंबर को मनाया जाएगा। सात सितंबर को नंदभवन में नंदोत्सव की धूम रहेगी। नंदभवन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन बाद ही मनाते हैं। सेवायत दीपक गोस्वामी ने बताया कि आषाढ़ की पूर्णिमा से प्रारंभ हुए 40 दिवसीय समाज गायन में समाजी एक माह तक झूलन महोत्सव के पदों का गायन करते हैं। रक्षाबंधन की रात से बधाई गायन प्रारंभ हो जाता है।
ढांढ़ी-ढांढिन लीला होती है आकर्षण का केंद्र
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की संध्या को बरसानावासी जन्म बधाई का लड्डू प्रसाद लेने नंदगांव आते हैं। रात में नंदभवन में भजन संध्या का आयोजन किया जाता है। लगभग साढ़े दस बजे ढांढ़ी ढांढिन लीला का मंचन गोस्वामी वर्ग करता है। इस लीला में श्रीकृष्ण की वंशावली सुनाई जाती है। मध्यरात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्म और अभिषेक का आयोजन होता है।
विज्ञापन
मथुरापुरी की महिमा श्रीमद्भागवत, महाभारत, गर्ग संहिता, अठारह पुराण सहित अनेक ग्रंथों और अभिलेखों में वर्णित है। भगवान विष्णु ने द्वापर युग में यहां श्रीकृष्ण रूप में अवतार लिया। पूरा ब्रज क्षेत्र राधा-कृष्ण की लीलाओं का बोध कराता है। भगवान के जन्म महोत्सव के बारे में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि जन्मस्थान के संपूर्ण परिसर को कलात्मक रूप से सजाया जा रहा है।
विज्ञापन
अवसर की महत्ता, जन्मस्थान की गरिमा और भक्तों की भावनाओं के अनुरूप नयनाभिराम साज सज्जा देखकर श्रद्धालु अभिभूत हो उठेंगे। संपूर्ण प्रांगण, भवनों और देवालय को ब्रज के भावुक भक्त सज्जाकार और पश्चिम बंगाल के कारीगर नयनाभिराम स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। मंदिर के संपूर्ण शिखर, गुंबद, तिवारियों, खिड़कियों, झरोखों, द्वार, गलियारों को अत्यंत सुंदर और कलात्मक रूप में सुसज्जित किया जा रहा है। श्रद्धालु जन्मस्थान को अंदर या बाहर जिस दिशा से भी निहारेंगे वह दर्शन अनुपम होंगे।
विज्ञापन
जन्मस्थान परिसर में ही स्थित श्रीकेशवदेव मंदिर में विविध प्रकार के पुष्प, पत्र और वस्त्रों से निर्मित भव्य बंगले में ठाकुरजी विराजमान होंगे। मंदिर के प्राचीन वास्तु के अनुरूप गर्भगृह के भीतरी भाग को सजाया जाएगा। पीले गोटे, पुष्प, रत्न प्रतिकृति के अद्भुत संयोजन से गर्भगृह को मूल स्वरूप में बिना कोई परिवर्तन किए दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा। बाहरी हिस्से में उत्कीर्ण भगवान के जन्म से पूर्व की लीलाएं भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहती हैं। इन स्थानों पर प्रकाश की विशेष व्यवस्था रहेगी।
भागवत भवन मंदिर के द्वार को जहां मंगल चिन्ह, उत्कीर्ण साज-सज्जा से सजाया जाएगा। विशाल जगमोहन को सुंदर पुष्प, घंटाकृति और अन्य मंगल चिन्हों से भव्य रूप दिया जा रहा है। ठाकुरजी के मुख्य श्रीविग्रह के समीप पुष्प सज्जा और पिछवाई दक्षिण भारतीय शैली के अनुरूप होगी। इस अवसर पर ठाकुरजी रेशम, जरी, सिल्क और रत्न प्रतिकृति के सुंदर संयोजन से बनी ‘चंद्रकी’ पोशाक धारण करेंगे। इस मौके पर संस्थान के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, संयुक्त मुख्य अधिशासी राजीव श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह, रणधीर कुमार सिंह, अनुराग पाठक, संजीव भारद्वाज आदि उपस्थित थे।
जन्मस्थान पर कार्यक्रम (5 सितंबर)
- प्रात:काल में दिव्य शहनाई और नगाड़ों के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन, इसके बाद पंचामृत अभिषेक, भगवान के पवित्र स्त्रोतों का पाठ और पुष्पार्चन
- सुबह 10:00 बजे श्रीकृष्णजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास महाराज और गुरु शरणानंद महाराज के सानिध्य में लीलामंच पर दिव्य पुष्पांजलि कार्यक्रम
- रात्रि 11:00 बजे श्रीगणेश-नवग्रह आदि पूजन से मुख्य कार्यक्रम आरंभ
- मध्य रात्रि 12:00 बजे से 12:10 तक भगवान के प्राकट्य के दर्शन। इसके बाद केसर आदि सुगंधित द्रव्यों से लिपटे हुए भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह अभिषेक स्थल पर पधारेंगे। श्रीविग्रह का दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि सामग्रियों से दिव्य महाअभिषेक
- 12:40 से 12:50 तक शृंगार आरती
- रात्रि 1:30 बजे तक हाेंगे जन्म के दर्शन
नंदबाबा मंदिर में छह को जन्माष्टमी
प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार छह सितंबर को मनाया जाएगा। सात सितंबर को नंदभवन में नंदोत्सव की धूम रहेगी। नंदभवन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन बाद ही मनाते हैं। सेवायत दीपक गोस्वामी ने बताया कि आषाढ़ की पूर्णिमा से प्रारंभ हुए 40 दिवसीय समाज गायन में समाजी एक माह तक झूलन महोत्सव के पदों का गायन करते हैं। रक्षाबंधन की रात से बधाई गायन प्रारंभ हो जाता है।
ढांढ़ी-ढांढिन लीला होती है आकर्षण का केंद्र
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की संध्या को बरसानावासी जन्म बधाई का लड्डू प्रसाद लेने नंदगांव आते हैं। रात में नंदभवन में भजन संध्या का आयोजन किया जाता है। लगभग साढ़े दस बजे ढांढ़ी ढांढिन लीला का मंचन गोस्वामी वर्ग करता है। इस लीला में श्रीकृष्ण की वंशावली सुनाई जाती है। मध्यरात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्म और अभिषेक का आयोजन होता है।