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Mathura News: यमुना मुक्ति के लिए जलसहेलियों ने भरी हुंकार, दिल्ली की ओर बढ़े कदम
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चौमुहां (मथुरा)। ब्रज की जीवनरेखा यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त और अविरल बनाने का संकल्प लेकर जालौन के पंचनद से शुरू हुई जलसहेली पदयात्रा बुधवार को वृंदावन में विश्राम के बाद चौमुहां पहुंची। यहां सीएसआरवी विद्या आश्रम में आयोजित समारोह में यमुना रक्षक दल और स्थानीय ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर पदयात्रियों का अभिनंदन किया।
यात्रा के चौमुहां पहुंचने पर यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास महाराज ने जलसहेलियों का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब मातृशक्ति ने किसी धर्मयुद्ध का बीड़ा उठाया है, तब-तब विजय निश्चित हुई है। यमुना को गंदे नालों के जहर से मुक्त कर उसे मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए जलसहेलियों का यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।
चौमुहां से जब यह यात्रा दिल्ली के लिए रवाना हुई, तो दृश्य भावुक और प्रेरणादायक था। यमुना मैया की जय और यमुना को शुद्ध करो के जयकारों के बीच सैकड़ों महिलाएं हाथों में बैनर लेकर नंगे पांव पदयात्रा कर रही हैं। जलसहेली संगठन के संस्थापक संजय सिंह ने कहा कि यह केवल पैदल मार्च नहीं, बल्कि यमुना के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है। यात्रा संयोजक मनीष राजपूत ने बताया कि जालौन के पंचनद से शुरू हुई यात्रा विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए दिल्ली के वासुदेव यमुना घाट पहुंचेगी। वहां केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष यमुना शुद्धिकरण की मांगों को प्रमुखता से रखा जाएगा।
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सहेली यात्रा समिति राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा कुशवाहा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड राज्यों से समन्वय कर उत्तर प्रदेश को उसके हिस्से का पानी दिया जाए, जिससे यमुना अविरल व निर्मल हो सके। इस मौके पर विद्यालय प्रबंधक मानवेंद्र सिंह, यमुना रक्षक दल जिलाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा, सौदान सिंह, निरोति भगत, भगवान सिंह, कर्मयोगी, सियाराम सिंह, श्याम सिंह, रतेंद्र सिसोदिया आदि मौजूद रहे।
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यात्रा के चौमुहां पहुंचने पर यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास महाराज ने जलसहेलियों का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब मातृशक्ति ने किसी धर्मयुद्ध का बीड़ा उठाया है, तब-तब विजय निश्चित हुई है। यमुना को गंदे नालों के जहर से मुक्त कर उसे मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए जलसहेलियों का यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।
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चौमुहां से जब यह यात्रा दिल्ली के लिए रवाना हुई, तो दृश्य भावुक और प्रेरणादायक था। यमुना मैया की जय और यमुना को शुद्ध करो के जयकारों के बीच सैकड़ों महिलाएं हाथों में बैनर लेकर नंगे पांव पदयात्रा कर रही हैं। जलसहेली संगठन के संस्थापक संजय सिंह ने कहा कि यह केवल पैदल मार्च नहीं, बल्कि यमुना के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है। यात्रा संयोजक मनीष राजपूत ने बताया कि जालौन के पंचनद से शुरू हुई यात्रा विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए दिल्ली के वासुदेव यमुना घाट पहुंचेगी। वहां केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष यमुना शुद्धिकरण की मांगों को प्रमुखता से रखा जाएगा।
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सहेली यात्रा समिति राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा कुशवाहा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड राज्यों से समन्वय कर उत्तर प्रदेश को उसके हिस्से का पानी दिया जाए, जिससे यमुना अविरल व निर्मल हो सके। इस मौके पर विद्यालय प्रबंधक मानवेंद्र सिंह, यमुना रक्षक दल जिलाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा, सौदान सिंह, निरोति भगत, भगवान सिंह, कर्मयोगी, सियाराम सिंह, श्याम सिंह, रतेंद्र सिसोदिया आदि मौजूद रहे।