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Mathura News: जल सहेलियों ने दिया अविरल-निर्मल यमुना का संदेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Feb 2026 12:53 AM IST
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Jal Sahelis spread the message of a continuous and clean Yamuna.
यमुना की मांग को लेकर नारे लगतीं जल सहेलियां। 
वृंदावन। जालौन के पचनद धाम से अविरल एवं निर्मल यमुना की मांग को लेकर शुरु हुई 300 जल सहेलियों की पदयात्रा 300 किलोमीटर का रास्ता तय कर वृंदावन पहुंची। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के छह जिलों की जल सहेलियों ने केसीघाट पर मानव शृंखला बनाकर एवं यमुना किनारे से फूल पत्तियों साफ कर अविरल एवं निर्मल यमुना का संदेश दिया।
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जल सहेलियां 17 दिन पदयात्रा कर वृंदावन पहुंचीं। पदयात्रा 26 फरवरी को दिल्ली के वासुदेव घाट पपहुंचकर यमुना कथा के साथ संपन्न होगी। जल सहेली समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा कुशवाहा ने रविवार को बताया कि मथुरा-वृंदावन आकर पता लगा कि उत्तर प्रदेश को यमुना से उसके हिस्से का पानी ही नहीं मिल पा रहा। अधिकतम यमुना जल हरियाणा द्वारा लिया जा रहा है। इसलिए अपने एकमात्र तीर्थ स्थल मथुरा पहुंचकर यमुना और भी दयनीय स्थिति में पहुंच गई है।
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उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड राज्यों से समन्वय स्थापित कर उत्तर प्रदेश को उसके हिस्से का पानी दिया जाए, जिससे यमुना अविरल व निर्मल हो सके। जल सहेली संगठन के संस्थापक संजय सिंह ने कहा कि नदियां हमारीं साझा विरासत हैं। इन्हें सरकार या समाज के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। दोनों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि लगभग 1250 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में बहने वाली यमुना नदी ने पंचनद में नया जीवन पाया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा ने कहा कि बुंदेलखंड में उन्होंने 6 नदियों का पुनर्जीवन किया है। यात्रा के दौरान अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हो रहे हैं, जिन्हें दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
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प्रधानमंत्री ने की प्रशंसा, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
जल सहेली समिति पदयात्रा में उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर एवं मध्यप्रदेश के टीकमगढ़, छतरपुर, निवाड़ी की जल सहेलियां शामिल हैं। वर्ष 2011 से पीने के पानी के लिए नदियों को पुनर्जीवित करने का भागीरथी संकल्प लेकर ये काम कर रही हैं। उनकी इस कोशिश की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 सितंबर 2024 को मन की बात में प्रशंसा की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन सहेलियों शारदा बंशकार, गीता देवी व गंगा राजपूत को जल-सुजल सम्मान से नवाजा था।
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