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खुद को बदलने से ही परिवर्तन: तरुण सागर

Mon, 14 Dec 2015 12:16 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो,अमर उजाला मथुरा Updated Mon, 14 Dec 2015 12:16 AM IST
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jain muni tarun sagar maharaj in kosi
राष्ट्र संत तरुण सागर महाराज ने रविवार को यहां अनाज मंडी में कड़वे प्रवचन कार्यक्रम में कहा कि अपने आप को बदलने से ही संसार में परिवर्तन लाया जा सकता है। अपने स्वभाव, अपने विचार और अपनी आदत को बदल दीजिए। हर हाल में जीने की आदत डालो।
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कार्यक्रम दोपहर में 2 बजे से शुरू होकर करीब साढे़ 5 बजे तक चला। मुनिश्री तरुण सागर ने कहा कि देखो 2 एकम 2 और 2 दूनी 4 यानि सभी को प्यार और सभी को क्षमा।
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अपने अतीत को मत भूलो और अपनी औकात को सदा याद रखो, उस दिन को मत भूलो जिस दिन तुम्हारे पास कुछ नहीं था। अगर यह याद रहा तो कभी अहंकार नहीं आएगा।

क्योंकि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है और ज्यादा पाने के लिए ज्यादा खोना पड़ता है, बहुत कुछ पाने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता है और सब कुछ पाने के लिए सबकुछ खोना पड़ता है।
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तरुण सागर महाराज ने कहा कि जीवन में दो लोगों को कभी नाराज मत करना एक तो डाक्टर और दूसरा भगवान को। क्योंकि भगवान को नाराज करोगे तो वह आपको डाक्टर के पास भेज देगा और डाक्टर को नाराज करोगे को वह आपको भगवान के पास भेज देगा।

मुनिश्री ने कहा कि सुबह उठकर नाश्ता करने, चाय पीने से पहले अपने इष्ट, अपने भगवान, अपने गुरु से सच्चे मन से प्रार्थना जरूर करना क्योंकि सुबह की प्रार्थना में बहुत बड़ी ताकत होती है। 

युवाओं को संदेश दिया कि जो कमाओ उसका एक हिस्सा माता-पिता के लिए जरूर देना। जिससे उनको दान, पुण्य करने के लिए किसी के सामने हाथ न फैलाना पडे़। दूसरा अपने पर्स में रुपयों के साथ अपने माता-पिता की तस्वीर जरूर रखना क्योंकि उसी तस्वीर ने तुम्हारा भाग्य लिखा है।

माता-पिता को एक वर्ष में एक तीर्थ जरूर कराना उससे ही तुम्हारा तीर्थ होगा।

मुनिश्री ने बुजुर्गों को परिवार का मार्ग प्रशस्त करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि आज बुजुर्ग क्यों दुखी हैं, वह इसलिए दुखी हैं कि वह सत्ता का सुख नहीं छोड़ना चाहता उन्होंने कहा कि अगर 60 वर्ष के हो जाओ तो सत्ता का सुख छोड़ दो, बेटे-बहू को जो अच्छा लगता है करने दो क्योंकि उनकी भी उम्र हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि सत्ता का सुख छोड़कर अपना जीवन गुरु सेवा, धर्म सेवा में लगा दो। इस दौरान बच्चों ने भजन भी पेश किए।

कड़वे प्रवचन
जीवन को सुखी रखने के लिए 10 वर्ष के हो जाओ तो मां की अंगुली पकड़कर चलना छोड़ दो। 20 के हो जाओ तो खिलौनों से खेलना छोड़ दो। 30 के हो जाओ तो नैन-मटक्का छोड़ दो।


 40 के हो जाओ तो रात का भोजन छोड़ दो। 50 के हो जाओ तो होटल जाना, 60 के हो जाओ तो व्यापार, 70 में बिस्तर, अस्सी में लस्सी और 90 में और जीने की चाहत छोड़ दो और पूरे 100 के हो जाओ तो दुनिया ही छोड़ देनी चाहिए।

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