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Mathura News: कभी भी धराशायी हो सकता है संक्रमण रोग अस्पताल
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वृंदावन। गौरानगर स्थित ब्रिटिशकालीन संक्रमण रोग चिकित्सालय देखरेख के अभाव में जहां जर्जर हो गया है, वहीं कई वर्ष से पानी की किल्लत से जूझ रहा है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। दो वार्ड भी गिरासू होने के कारण ताला जड़ा है। उनके दरवाजे और खिड़की टूटी पड़ी हैं, लेकिन इस ओर से स्वास्थ्य अधिकारियों ने पीठ कर ली है।
वृंदावन के गौरानगर में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सात दशक पहले संक्रमण रोग चिकित्सालय (हैजा अस्पताल) की स्थापना की थी, लेकिन इसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसी अस्पताल के परिसर में करोड़ोंं रुपये की लागत से वेलनेस सेंटर बनाया गया। उसके स्टाफ के रहने के लिए र्क्वाटर भी बनाए गए, लेकिन संक्रमण रोग चिकित्सालय की कई दशक से मरम्मत तक नहीं की गई।
यही कारण है कि नगर के बीच 16 बेड का अस्पताल जर्जर हो गया है। उसके दोनों ओर बने वार्ड कभी भी धराशायी हो सकते हैं। वार्ड के दरवाजे और खिड़की टूट गईं हैं। गिरासू होने के कारण उनमें ताले लगा दिए गए हैं। इसके अलावा अस्पताल परिसर में ओवर हैड टैंक और दो हैंडपंप और एक प्याऊ लगी है, लेकिन टंकी में पानी की आपूर्ति नहीं होती, दोनों नल खराब हैं।
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लाखों की लागत से बनीं प्याऊ एक दिन भी नहीं चली। इस कारण अस्पताल में पानी नहीं है। पानी के अभाव के कारण अस्पताल में बने शौचालय भी बंद है। उधर स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बने क्वार्टर भी जर्जर है है। उसमें रह रहे लोगों को हर पल जान का खतरा बना रहता है।
अस्पताल के डॉ. फ्रेंकी गोस्वामी ने बताया कि अस्पताल की मरम्मत वर्षों से नहीं हुई। न ही पानी के लिए किसी तरह का इंतजाम है। इतना ही नहीं र्क्वाटर भी पुराने होने के कारण जर्जर हो गए हैं। कभी भी गिर सकते हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया दिया गया है।
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वृंदावन के गौरानगर में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सात दशक पहले संक्रमण रोग चिकित्सालय (हैजा अस्पताल) की स्थापना की थी, लेकिन इसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसी अस्पताल के परिसर में करोड़ोंं रुपये की लागत से वेलनेस सेंटर बनाया गया। उसके स्टाफ के रहने के लिए र्क्वाटर भी बनाए गए, लेकिन संक्रमण रोग चिकित्सालय की कई दशक से मरम्मत तक नहीं की गई।
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यही कारण है कि नगर के बीच 16 बेड का अस्पताल जर्जर हो गया है। उसके दोनों ओर बने वार्ड कभी भी धराशायी हो सकते हैं। वार्ड के दरवाजे और खिड़की टूट गईं हैं। गिरासू होने के कारण उनमें ताले लगा दिए गए हैं। इसके अलावा अस्पताल परिसर में ओवर हैड टैंक और दो हैंडपंप और एक प्याऊ लगी है, लेकिन टंकी में पानी की आपूर्ति नहीं होती, दोनों नल खराब हैं।
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लाखों की लागत से बनीं प्याऊ एक दिन भी नहीं चली। इस कारण अस्पताल में पानी नहीं है। पानी के अभाव के कारण अस्पताल में बने शौचालय भी बंद है। उधर स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बने क्वार्टर भी जर्जर है है। उसमें रह रहे लोगों को हर पल जान का खतरा बना रहता है।
अस्पताल के डॉ. फ्रेंकी गोस्वामी ने बताया कि अस्पताल की मरम्मत वर्षों से नहीं हुई। न ही पानी के लिए किसी तरह का इंतजाम है। इतना ही नहीं र्क्वाटर भी पुराने होने के कारण जर्जर हो गए हैं। कभी भी गिर सकते हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया दिया गया है।