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Karva Chauth इन्दुलेखा ने बांके बिहारी के लिए रखा करवा चौथ का व्रत, ठाकुरजी के दर्शन कर खोला उपवास
Fri, 10 Oct 2025 10:58 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला नेटवर्क, नंदगांव (मथुरा)
अमर उजाला नेटवर्क, नंदगांव (मथुरा)
Published by: आकाश दुबे
Updated Fri, 10 Oct 2025 10:58 PM IST
सार
इन्दुलेखा ने कहा, यह कोई सांसारिक बंधन नहीं, आत्मा का मिलन है। मेरे लिए करवा चौथ का अर्थ प्रभु के चरणों में समर्पण है। जिस दिन मैंने ठाकुरजी को अपना पति माना, उसी दिन से मेरा हर पर्व उन्हीं के नाम है।
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इन्दुलेखा ने बांके बिहारी के लिए रखा करवा चौथ का व्रत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भगवान श्री कृष्ण की नगरी नंदगांव का वातावरण शुक्रवार की रात और भी अनुपम हो गया, जब रोहतक (हरियाणा) की इन्दुलेखा उर्फ ज्योति ने कान्हा के घर नंदबाबा मंदिर में करवा चौथ का व्रत रखा। इन्दुलेखा वही हैं जिन्होंने इसी वर्ष 15 फरवरी को ठाकुर बांके बिहारी जी को अपना पति मानकर विवाह किया था। जन्माष्टमी पर जहां नंदगांव में उन्होंने ठाकुरजी का जन्मोत्सव पति रूप में मनाया था, वहीं करवा चौथ के अवसर पर उन्होंने पति बांके बिहारी जी की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखकर श्रद्धा की मिसाल पेश की।
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सुबह से ही इन्दुलेखा ने निर्जला उपवास का संकल्प लिया। उन्होंने दिन भर ठाकुरजी के भजन-कीर्तन में समय बिताया और कान्हा के गांव नंदगांव में नंदबाबा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। चांद निकलने की बेला में उन्होंने ठाकुर बांके बिहारी जी की प्रतिमा के सामने दीप जलाया, चंद्रमा को अर्घ्य दिया और फिर अपने ‘पति’ ठाकुरजी के दर्शन कर व्रत खोला।
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इन्दुलेखा ने कहा, “यह कोई सांसारिक बंधन नहीं, आत्मा का मिलन है। मेरे लिए करवा चौथ का अर्थ प्रभु के चरणों में समर्पण है। जिस दिन मैंने ठाकुरजी को अपना पति माना, उसी दिन से मेरा हर पर्व उन्हीं के नाम है।” उनका यह भावुक समर्पण देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने इसे ‘आधुनिक मीराबाई का प्रेम’ बताया। ब्रज की रज, यमुना की लहरें और करवा चौथ की चांदनी में इन्दुलेखा का यह अनूठा व्रत दृश्य भक्ति, प्रेम और समर्पण का अद्भुत संगम बन गया।
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