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Mathura News: स्टेडियम और विद्यालयों में बढ़ाएं क्रिकेट की सुविधाएं
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अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में भाग लेते खिलाड़ी, कोच व जिला क्रिकेट एसोशिएसन के पदाधिकारी।
मथुरा। मथुरा में क्रिकेट की सुविधाएं भी काफी बढ़ चुकी हैं। क्रिकेट अकादमियों में कई उभरते हुए क्रिकेटर भी सामने आ रहे हैं। इनमें महिला क्रिकेटर भी शामिल हैं, लेकिन खेल प्रशिक्षक व खिलाड़ियों का मानना है कि जिले के स्टेडियम में सुविधाओं का अभाव है। वहीं निजी व सरकारी स्कूलों में स्पोर्टस फीस लेने के बाद भी बच्चों को खेल सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। अगर सभी मिलकर प्रयास करें तो जिले से कई खिलाड़ी देश-विदेश में नाम रोशन कर सकते हैं।
मथुरा जिला क्रिकेट संघ से जुड़े वरिष्ठ प्रशिक्षक कमल चावला का मानना है कि स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल सुविधाएं नहीं हैं। क्रिकेट समेत कई कोच तक नहीं हैं। इसके बाद भी मथुरा में पार्थ, ऋषभ जैसे खिलाड़ी निकल रहे हैं। नामी-गिरामी स्कूल स्पोर्ट्स के नाम पर फीस वसूलते हैं मगर खेल सुविधाओं के नाम पर शून्य हैं। ऐसे में अभिभावकों को भी स्कूलों से पूछना चाहिए। एमसीए के संयुक्त सचिव उमेश चौरसिया बताते हैं कि अकादमियों में रात्रि क्रिकेट के लिए फ्लड लाइटों से लेकर टर्फ विकेट जैसी सुविधाएं हैं। खिलाड़ी निखर रहे हैं। लड़कियों के विश्व कप जीतने के बाद लड़कियां भी क्रिकेट के प्रति गंभीर हो गई हैं। कोच रोहित सिंह का कहना है कि अंतर विद्यालयी क्रिकेट व अन्य खेलकूद को बढ़ावा देना चाहिए। स्पोर्ट्स के लिए मथुरा में काफी जगह है मगर सरकारी मशीनरी का ध्यान नहीं है। प्रशिक्षक मोहम्मद असलम खान कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों से जुड़े खिलाड़ी भी शहर में रहकर मेहनत कर रहे हैं। अभिभावक जल्दी परिणाम चाहते हैं मगर खेलकूद में परिणाम देने में वक्त लगता है।
अकादमी संचालक व क्रिकेट प्रशिक्षक हिमांशु अग्रवाल का माना है कि जिले में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। दीप्ति शर्मा जैसी खिलाड़ी को विश्व कप जिताने के बाद डीएसपी बनाया गया। प्रशिक्षक हेमराज चौधरी का कहना था कि क्रिकेट में बहुत कड़ा कंप्टीशन है। यूपी का कोटा बढ़ना चाहिए। प्रतिभाएं प्रदेश से पलायन करके दूसरे प्रदेशों में खेलने को मजबूर हैं। वृंदावन क्रिकेट से जुड़े मोहम्मद अखलाक खान ने भी खेल मैदान बढ़ाने की बात कही। जगदीश अग्रवाल, आकाश सोलंकी, रितेश शर्मा ने भी क्रिकेट के अधिकाधिक टूर्नामेंट कराए जाने की बात कही। इस दौरान विजय गौतम, अंजली सैनी, योत्सना चौधरी, रवि गुर्जर, पवन शर्मा, आर्यन, विजय, प्रांजल सिंह, पार्थ चौधरी, हंसराज, लोकेश तोमर आदि ने भी अपने विचार साझा किए।
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मथुरा जिला क्रिकेट संघ से जुड़े वरिष्ठ प्रशिक्षक कमल चावला का मानना है कि स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल सुविधाएं नहीं हैं। क्रिकेट समेत कई कोच तक नहीं हैं। इसके बाद भी मथुरा में पार्थ, ऋषभ जैसे खिलाड़ी निकल रहे हैं। नामी-गिरामी स्कूल स्पोर्ट्स के नाम पर फीस वसूलते हैं मगर खेल सुविधाओं के नाम पर शून्य हैं। ऐसे में अभिभावकों को भी स्कूलों से पूछना चाहिए। एमसीए के संयुक्त सचिव उमेश चौरसिया बताते हैं कि अकादमियों में रात्रि क्रिकेट के लिए फ्लड लाइटों से लेकर टर्फ विकेट जैसी सुविधाएं हैं। खिलाड़ी निखर रहे हैं। लड़कियों के विश्व कप जीतने के बाद लड़कियां भी क्रिकेट के प्रति गंभीर हो गई हैं। कोच रोहित सिंह का कहना है कि अंतर विद्यालयी क्रिकेट व अन्य खेलकूद को बढ़ावा देना चाहिए। स्पोर्ट्स के लिए मथुरा में काफी जगह है मगर सरकारी मशीनरी का ध्यान नहीं है। प्रशिक्षक मोहम्मद असलम खान कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों से जुड़े खिलाड़ी भी शहर में रहकर मेहनत कर रहे हैं। अभिभावक जल्दी परिणाम चाहते हैं मगर खेलकूद में परिणाम देने में वक्त लगता है।
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अकादमी संचालक व क्रिकेट प्रशिक्षक हिमांशु अग्रवाल का माना है कि जिले में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। दीप्ति शर्मा जैसी खिलाड़ी को विश्व कप जिताने के बाद डीएसपी बनाया गया। प्रशिक्षक हेमराज चौधरी का कहना था कि क्रिकेट में बहुत कड़ा कंप्टीशन है। यूपी का कोटा बढ़ना चाहिए। प्रतिभाएं प्रदेश से पलायन करके दूसरे प्रदेशों में खेलने को मजबूर हैं। वृंदावन क्रिकेट से जुड़े मोहम्मद अखलाक खान ने भी खेल मैदान बढ़ाने की बात कही। जगदीश अग्रवाल, आकाश सोलंकी, रितेश शर्मा ने भी क्रिकेट के अधिकाधिक टूर्नामेंट कराए जाने की बात कही। इस दौरान विजय गौतम, अंजली सैनी, योत्सना चौधरी, रवि गुर्जर, पवन शर्मा, आर्यन, विजय, प्रांजल सिंह, पार्थ चौधरी, हंसराज, लोकेश तोमर आदि ने भी अपने विचार साझा किए।
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