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कान्हा की नगरी मेें सिर्फ वन विभाग की फाइलोें मेें हरियाली

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jun 2022 11:51 PM IST
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In the city of Kanha, there is only greenery in the files of the Forest Department.
मथुरा। कैमरा, वीडियो, लोगों की भीड़ और उनके बीच में एक पौधा। फोटो खिंचाकर सरकारी फाइलों का रिकॉर्ड पूरा परंतु जिन पौधों के संग अधिकारी व अन्य लोग फोटो खिंचाते हैं, वह पौधा शायद ही कभी पेड़ बन सका हो। यही कारण है कि मथुरा में वन क्षेत्र घट रहा है।
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सरकार पौधरोपण का हर वर्ष लक्ष्य अवश्य बढ़ाती जा रही है लेकिन उनकी देखभाल और संरक्षण के लिए कारगर उपायों में लगातार कमी आ रही है। जिसके चलते जनपद में हर वर्ष लाखोेें की संख्या में पौधरोपण होता परंतु वह सिर्फ कागजों ही होकर रह जाता है। यही कारण है कि मथुरा में हरियाली २.९६ वर्ग किलोमीटर घटी है।
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पुराने शहर में गुंजाइश नहीं
दरअसल, मथुरा के पुराने शहर में हरियाली की गुंजाइश नहीं है। नए क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं, जहां पर हरियाली का क्षेत्र छोड़ा जा रहा है। शहर में ३३ फीसदी हिस्सा हरियाली का होना चाहिए। प्राधिकरण जो नया मास्टर प्लान तैयार कर रहा है, उसमें करीब ४० फीसदी हिस्सा हरियाली का छोड़ने की योजना है। फिलहाल मिलिट्री एरिया में हरियाली सबसे अधिक है। इसके अलावा शहर में कुछ नई कॉलोनियां बसी हैं, जिसमें हर भरा क्षेत्र दिखाई देता है। पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह के मुताबिक दो साल पहले मथुरा का क्षेत्रफल ३३४० वर्ग किलोमीटर था, जिसमें ५७.०४ वर्ग किलोमीटर वन्य क्षेत्र है।
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पौधरोपण का हर वर्ष लक्ष्य बढ़ा ं
-२०१६ में चार लाख
-२०१७ में पांच लाख
-२०१८ में सात लाख
-२०१९ में २१.५ लाख
-२०२० में २६.५ लाख
-२०२१ में ३२ लाख
-२०२२ में ४२ लाख पौधों का लक्ष्य रखा गया
-२०१९-२० में ३.५२ वर्ग किलोमीटर की कमी दर्ज की गई थी
-२०२१ में सर्वे के दौरान ५१ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल हरियाली का बढ़ा
-२०२२ में खुले जंगल में २.९६ वर्ग किलोमीटर की कमी आई है
- जिले में पौधरोपण के लिए वन विभाग हर वर्ष अभियान चलाता है। शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाता है। लोगों को निशुल्क पौधे दिए जाते हैं। प्रयास किया जा रहा कि जिले में वन आच्छादित का हिस्सा बढ़े।
- रजनी कांत मित्तल, डीएफओ
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