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वर्तमान समय में विद्यार्थी ऊर्जावान और बुद्धिमान हैं : डॉ. देवदत्त
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मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय के मैकेनिकल विभाग में आयोजित दो दिवसीय प्रथम इंटरनेशनल आईसीएमएमई कॉफ्रेंस 2022 के मुख्य अतिथि एनएमआरएल डीआरडीओ प्रमुख डॉ. देवदत्त रत्न ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थी ऊर्जावान और बुद्धिमान हैं। इसलिए विद्यार्थियों को क्लास रूम की शिक्षा के अतिरिक्त प्रदर्शनी, कार्यशाला, कांफ्रेंस, डिस्कशन में प्रतिभाग करने की आवश्यकता है। इससे रोजगार और उद्यमिता की राह आसान होती है।
डॉ. रत्न ने दो दिवसीय कॉफ्रेंस में एस्पेक्टस ऑफ मैटेरियल्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग पर विद्यार्थियों से रूबरू होते हुए कहा कि इंजीनियरिंग मैटेरियल साइंस के अंतर्गत आता है। एक अच्छे इंजीनियरिंग मैटेरियल का यह प्राथमिक कार्य है कि वह बिना किसी वातावरण नुकसान के बेहतर कार्य को अंजाम दे सके।
डीएसटी नई दिल्ली के वैज्ञानिक विशिष्ट अतिथि डॉ. एसके वार्ष्णेय ने कहा कि एक वैज्ञानिक नए ज्ञान का सृजन करता है और इंजीनियर नई एप्लीकेशन इजाद करता है। इंजीनियर कोई डिवाइस बनाता है, तो अपने समाज की समस्या को हल करने के लिए बहुत प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में एक यांत्रिक इंजीनियर को नई तकनीक और अनुप्रयोगो के साथ उपयोग की जाने वाली ऊर्जा की मात्रा को कम करने के लिए अनुप्रयोगाें को विकसित करके प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। स्मैकनेट सॉल्यूसंस के सीईओ सुशील गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालयों में मॉडलिंग जैसे क्लब होने चाहिए। क्लबों में इंडस्ट्री की मांग के अनुसार इक्यूपमेंट होने चाहिए। एचएएल मुख्य प्रबंधक फहेंद्र सिंह चौहान, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. पीयूष सिंघल, डॉ. विजय कुमार द्विवेदी, डॉ. भरत सिंह, डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा आदि शामिल रहे। ब्यूरो
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डॉ. रत्न ने दो दिवसीय कॉफ्रेंस में एस्पेक्टस ऑफ मैटेरियल्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग पर विद्यार्थियों से रूबरू होते हुए कहा कि इंजीनियरिंग मैटेरियल साइंस के अंतर्गत आता है। एक अच्छे इंजीनियरिंग मैटेरियल का यह प्राथमिक कार्य है कि वह बिना किसी वातावरण नुकसान के बेहतर कार्य को अंजाम दे सके।
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डीएसटी नई दिल्ली के वैज्ञानिक विशिष्ट अतिथि डॉ. एसके वार्ष्णेय ने कहा कि एक वैज्ञानिक नए ज्ञान का सृजन करता है और इंजीनियर नई एप्लीकेशन इजाद करता है। इंजीनियर कोई डिवाइस बनाता है, तो अपने समाज की समस्या को हल करने के लिए बहुत प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में एक यांत्रिक इंजीनियर को नई तकनीक और अनुप्रयोगो के साथ उपयोग की जाने वाली ऊर्जा की मात्रा को कम करने के लिए अनुप्रयोगाें को विकसित करके प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। स्मैकनेट सॉल्यूसंस के सीईओ सुशील गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालयों में मॉडलिंग जैसे क्लब होने चाहिए। क्लबों में इंडस्ट्री की मांग के अनुसार इक्यूपमेंट होने चाहिए। एचएएल मुख्य प्रबंधक फहेंद्र सिंह चौहान, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. पीयूष सिंघल, डॉ. विजय कुमार द्विवेदी, डॉ. भरत सिंह, डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा आदि शामिल रहे। ब्यूरो
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