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Mathura News: खून की कमी से गर्भवती महिलाओं की सेहत पर असर
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मथुरा। जिले में एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। महिला अस्पताल में प्रतिदिन 20 गर्भवती महिला पहुंच रही हैं। इनमें खून की कमी पाई जा रही है। चिकित्सक उन्हें दवा के साथ खानपान में सुधार की सलाह दे रहे हैं।
गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार की कमी, समय पर जांच न कराना और आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों का नियमित सेवन न करना इस समस्या के मुख्य कारण माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के अभाव और पोषण संबंधी लापरवाही के चलते हालात चिंताजनक हैं।
महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा शर्मा ने बताया कि एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को कमजोरी, चक्कर, थकान और प्रसव के दौरान जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे न केवल मां बल्कि शिशु के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा हो जाता है।
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कई मामलों में समय पर उपचार न मिलने से जोखिम और बढ़ जाता है। इलाज के साथ ही गर्भवती महिलाओं को हरी सब्जियां, फल, दालें और आयरन युक्त आहार लेने से समस्या दूर जाती है। उन्होंने नियमित जांच, समय पर दवा का सेवन और चिकित्सकीय परामर्श को जरूरी बताया है।
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गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार की कमी, समय पर जांच न कराना और आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों का नियमित सेवन न करना इस समस्या के मुख्य कारण माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के अभाव और पोषण संबंधी लापरवाही के चलते हालात चिंताजनक हैं।
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महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा शर्मा ने बताया कि एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को कमजोरी, चक्कर, थकान और प्रसव के दौरान जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे न केवल मां बल्कि शिशु के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा हो जाता है।
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कई मामलों में समय पर उपचार न मिलने से जोखिम और बढ़ जाता है। इलाज के साथ ही गर्भवती महिलाओं को हरी सब्जियां, फल, दालें और आयरन युक्त आहार लेने से समस्या दूर जाती है। उन्होंने नियमित जांच, समय पर दवा का सेवन और चिकित्सकीय परामर्श को जरूरी बताया है।