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शहर में बगैर नक्शे के ही खड़ी हो रही इमारतें
अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 19 Jul 2016 11:47 PM IST
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शहर में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। कई जगह छोटी-छोटी कालोनियां बनकर खड़ी हो गईं, लेकिन किसी का ध्यान ही नहीं गया। जब लोग रहने लगते हैं तब प्रशासन की निगाह पड़ती है। यह कालोनियां मानकों को भी पूरा नहीं कर रही हैं।
सोमवार को मोहली रोड पर गिरी इमारत ने प्रशासन की सारी पोल खोलकर रख दी। यहां निर्माण में मानकों को पूरा नहीं किया गया था। अब जब हल्ला मचा तो अफसर दौड़ रहे हैं। जिलाधिकारी निखिल चंद्र शुक्ला ने बगैर नक्शे हो रहे निर्माण को तत्काल रुकवाने को आदेश दिए। लगातार होने वाले अवैध निर्माण से मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।
दो साल पहले भी हो चुका है हादसा
कृष्णानगर क्षेत्र में दो साल पहले एक निर्माणाधीन भवन भरभराकर गिर गया था। मलबे में दबकर दो मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हुए थे। नक्शा तो इस भवन का पास था, लेकिन प्राधिकरण के इंजीनियरों ने कभी यहां जाकर नहीं देखा कि निर्माण में मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। इस मामले में क्षेत्रीय तत्कालीन सहायक अभियंता और अवर अभियंता को सस्पेंड कर दिया गया था।
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शहर में 250 भवन गिराऊ हालत में
नगरपालिका प्रशासन के सर्वे के मुताबिक शहर में करीब 250 भवन गिराऊ स्थिति में हैं। इनमें कई प्राचीन इमारतें भी हैं। इन सभी को नोटिस भी जारी कर दिया गया है। तमाम दुकानें भी जर्जर अवस्था में खड़ी हैं। पुराने शहर में ऐसे भवनों की संख्या ज्यादा है।
नगर पालिका प्रशासन के रिकार्ड के मुताबिक इन भवनों में कोई 50 साल पुराना हो चुका है तो कोई इससे भी अधिक पुराना है। जगह-जगह से यह भवन चटकने लगे हैं। कब गिर जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। अफसरों का कहना है कि कई भवन तो ऐसे हैं जिन्हें लेकर दो गुटों के बीच विवाद चला आ रहा है। अब प्रशासन ने दोबारा से ऐसे भवनों का चिन्हीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।
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सोमवार को मोहली रोड पर गिरी इमारत ने प्रशासन की सारी पोल खोलकर रख दी। यहां निर्माण में मानकों को पूरा नहीं किया गया था। अब जब हल्ला मचा तो अफसर दौड़ रहे हैं। जिलाधिकारी निखिल चंद्र शुक्ला ने बगैर नक्शे हो रहे निर्माण को तत्काल रुकवाने को आदेश दिए। लगातार होने वाले अवैध निर्माण से मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।
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दो साल पहले भी हो चुका है हादसा
कृष्णानगर क्षेत्र में दो साल पहले एक निर्माणाधीन भवन भरभराकर गिर गया था। मलबे में दबकर दो मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हुए थे। नक्शा तो इस भवन का पास था, लेकिन प्राधिकरण के इंजीनियरों ने कभी यहां जाकर नहीं देखा कि निर्माण में मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। इस मामले में क्षेत्रीय तत्कालीन सहायक अभियंता और अवर अभियंता को सस्पेंड कर दिया गया था।
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शहर में 250 भवन गिराऊ हालत में
नगरपालिका प्रशासन के सर्वे के मुताबिक शहर में करीब 250 भवन गिराऊ स्थिति में हैं। इनमें कई प्राचीन इमारतें भी हैं। इन सभी को नोटिस भी जारी कर दिया गया है। तमाम दुकानें भी जर्जर अवस्था में खड़ी हैं। पुराने शहर में ऐसे भवनों की संख्या ज्यादा है।
नगर पालिका प्रशासन के रिकार्ड के मुताबिक इन भवनों में कोई 50 साल पुराना हो चुका है तो कोई इससे भी अधिक पुराना है। जगह-जगह से यह भवन चटकने लगे हैं। कब गिर जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। अफसरों का कहना है कि कई भवन तो ऐसे हैं जिन्हें लेकर दो गुटों के बीच विवाद चला आ रहा है। अब प्रशासन ने दोबारा से ऐसे भवनों का चिन्हीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।