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लट्ठ चलाने को सेहत बना रहीं बरसाने की हुरियारिनें
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 20 Feb 2017 11:55 PM IST
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लठामार होली
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एक घंटे तक बिना रुके लट्ठ चलाना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन लठामार होली में बरसाना की हुरियारिनें यह कमाल दिखाएंगी। इसके लिए वह तैयारी कर रही हैं। दूध और बादाम का सेवन किया जा रहा है। हलवा, फल और जूस सुबह शाम लिया जा रहा है। इन तेरह दिनों में यह अपनी सेहत बनाएंगी।
बरसाना की महिलाओं को लठामार होली का साल भर इंतजार रहता है। इंतजार हो भी क्यों नहीं। एक दिन यही तो होता है जब वह गोपी स्वरूप में नंदगांव के कृष्ण स्वरूप ग्वालों के संग होली खेलती हैं। नंदगांव के हुरियारों पर लट्ठ बरसाया जाता है। 50 मिनट से भी ज्यादा वक्त लट्ठ चलता है। अब यह बिना अभ्यास के भी मुमकिन नहीं है। ताकत भी लगती है।
रजनी गोस्वामी का कहना है कि लठामार होली से पहले सेहत बनाने वाली चीजों का प्रयोग होता है। दूध, हलवा, बादाम, फल और जूस लिया जाता है ताकि वह बगैर रुके लट्ठ चला सकें। इंदु गौड़ का कहना है कि पहले तो बहुत तैयारियां हुआ करती थीं। हर घर में महिलाएं एक महीना पहले से दूध और घी का प्रयोग बढ़ा दिया करती थीं।
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अब भी तैयारियां तो करनी ही पड़ती हैं। नेहा गोस्वामी का कहना है कि बगैर अभ्यास कुछ संभव नहीं है। लाठी वही चला सकता है जिसने प्रैक्टिस की होती है। खानपान पर भी ध्यान दिया जाता है ताकि बिना रुके नंदगांव के हुरियारों पर लट्ठ चला सकें। जो भी नई बहुएं हैं और पहली दफा होली खेलेंगी उन्हें बाकायदा होली के बारे में बताया जा रहा है। बरसाना की होली का पूरा इतिहास इन्हें पढ़ाया जाता है।
नंदगांव की महिलाएं भी जुटी तैयारियों में
बरसाना के बाद नंदगांव में भी लठामार होली होती है। इसमें शामिल होने के लिए बरसाना के लोग पहुंचते हैं। खूब रंग और गुलाल उड़ता है। यहां हुरियारिनें नंदगांव की होती हैं जबकि हुरियारे बरसाना के होते हैं। बड़ी संख्या में लोग होली को देखने के लिए पहुंचते हैं। नंदगांव की शांति देवी, पुष्पा देवी और गायत्री ने बताया कि नंदगांव में होने वाली लठामार होली की तैयारियां की जा रही हैं। महिलाएं इस समय पौष्टिक आहार ले रही हैं ताकि लगातार लाठी चलाने के लिए ताकत मिल सके।
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बरसाना की महिलाओं को लठामार होली का साल भर इंतजार रहता है। इंतजार हो भी क्यों नहीं। एक दिन यही तो होता है जब वह गोपी स्वरूप में नंदगांव के कृष्ण स्वरूप ग्वालों के संग होली खेलती हैं। नंदगांव के हुरियारों पर लट्ठ बरसाया जाता है। 50 मिनट से भी ज्यादा वक्त लट्ठ चलता है। अब यह बिना अभ्यास के भी मुमकिन नहीं है। ताकत भी लगती है।
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रजनी गोस्वामी का कहना है कि लठामार होली से पहले सेहत बनाने वाली चीजों का प्रयोग होता है। दूध, हलवा, बादाम, फल और जूस लिया जाता है ताकि वह बगैर रुके लट्ठ चला सकें। इंदु गौड़ का कहना है कि पहले तो बहुत तैयारियां हुआ करती थीं। हर घर में महिलाएं एक महीना पहले से दूध और घी का प्रयोग बढ़ा दिया करती थीं।
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अब भी तैयारियां तो करनी ही पड़ती हैं। नेहा गोस्वामी का कहना है कि बगैर अभ्यास कुछ संभव नहीं है। लाठी वही चला सकता है जिसने प्रैक्टिस की होती है। खानपान पर भी ध्यान दिया जाता है ताकि बिना रुके नंदगांव के हुरियारों पर लट्ठ चला सकें। जो भी नई बहुएं हैं और पहली दफा होली खेलेंगी उन्हें बाकायदा होली के बारे में बताया जा रहा है। बरसाना की होली का पूरा इतिहास इन्हें पढ़ाया जाता है।
नंदगांव की महिलाएं भी जुटी तैयारियों में
बरसाना के बाद नंदगांव में भी लठामार होली होती है। इसमें शामिल होने के लिए बरसाना के लोग पहुंचते हैं। खूब रंग और गुलाल उड़ता है। यहां हुरियारिनें नंदगांव की होती हैं जबकि हुरियारे बरसाना के होते हैं। बड़ी संख्या में लोग होली को देखने के लिए पहुंचते हैं। नंदगांव की शांति देवी, पुष्पा देवी और गायत्री ने बताया कि नंदगांव में होने वाली लठामार होली की तैयारियां की जा रही हैं। महिलाएं इस समय पौष्टिक आहार ले रही हैं ताकि लगातार लाठी चलाने के लिए ताकत मिल सके।