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अब मथुरा में नजर आएंगे अनार के बगीचे
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मथुरा। आलू की फसल के लिए प्रख्यात मथुरा जनपद में अब अनार की खेती की शुरुआत होने जा रही है। कोरोना वायरस के इस दौर में किसानों को रोजगार देने की दृष्टि से मनरेगा स्कीम के तहत उद्यान विभाग ने अनार के बगीचा लगाने की पहल की है।
धार्मिक नगरी मथुरा खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। यहां सब्जियों में आलू के अलावा गेहूं और चावल की भी बड़े क्षेत्रफल में खेती होती है। अब सरकार की कोशिश यहां फलों का उत्पादन बढ़ाने की भी है। इसके लिए सरकार बागवानी को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश सरकार ने मथुरा में नीबू, अमरूद के अलावा अनार की खेती को भी प्रोत्साहित करते हुए किसानों से सरकारी खर्च पर बगीचे लगाने की पहल की है।
जिला उद्यान अधिकारी जगदीश प्रसाद ने बताया कि जनपद का किसान नीबू, अमरूद और अनार का बगीचा लगाना चाहता है तो इस पर होने वाली मजदूरी मनरेगा से मिलेगी, जिसमें खेत तैयार करने, उसमें गड्ढे आदि का काम शामिल है। किसान के साथ दो अन्य मजदूरों को भी मनरेगा से काम मिलेगा।
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इसके बाद पौधे, कीटनाशक दवाएं भी सरकारी खर्च पर मिलेंगी। इसके लिए किसान को विभाग में पंजीकरण कराना होगा। वर्तमान में जनपद में अमरूद और नीबू के बगीचा का क्षेत्रफल तो बढ़ रहा है, लेकिन अनार की स्थिति अभी ज्यादा नहीं है। इसकी शुरुआत के लिए भी सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित करने का काम किया है।
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धार्मिक नगरी मथुरा खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। यहां सब्जियों में आलू के अलावा गेहूं और चावल की भी बड़े क्षेत्रफल में खेती होती है। अब सरकार की कोशिश यहां फलों का उत्पादन बढ़ाने की भी है। इसके लिए सरकार बागवानी को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश सरकार ने मथुरा में नीबू, अमरूद के अलावा अनार की खेती को भी प्रोत्साहित करते हुए किसानों से सरकारी खर्च पर बगीचे लगाने की पहल की है।
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जिला उद्यान अधिकारी जगदीश प्रसाद ने बताया कि जनपद का किसान नीबू, अमरूद और अनार का बगीचा लगाना चाहता है तो इस पर होने वाली मजदूरी मनरेगा से मिलेगी, जिसमें खेत तैयार करने, उसमें गड्ढे आदि का काम शामिल है। किसान के साथ दो अन्य मजदूरों को भी मनरेगा से काम मिलेगा।
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इसके बाद पौधे, कीटनाशक दवाएं भी सरकारी खर्च पर मिलेंगी। इसके लिए किसान को विभाग में पंजीकरण कराना होगा। वर्तमान में जनपद में अमरूद और नीबू के बगीचा का क्षेत्रफल तो बढ़ रहा है, लेकिन अनार की स्थिति अभी ज्यादा नहीं है। इसकी शुरुआत के लिए भी सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित करने का काम किया है।