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Braj Holi 2025: बांके बिहारी मंदिर की है ये होली, हवा में उड़ता गुलाल और रंगों की बौछार; VIDEO देख झूम उठेंगे
Mon, 10 Mar 2025 04:01 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 10 Mar 2025 04:01 PM IST
सार
Bankebihari Temple: बांके बिहारी मंदिर में भक्ति और रंगों का अद्भुत समागम नजर आ रहा है। अब से पांच दिन ऐसा ही दृश्य यहां देखने को मिलेगा।
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बांके बिहारी मंदिर में होली
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
Mathura Holi: ब्रजमंडल में होली की धूम जोरों पर है। रंगभरनी एकादशी के पावन अवसर से ही कान्हा की नगरी में पंच दिवसीय रंगोत्सव का शुभारंभ हो चुका है। चारों ओर भक्तों के टोलियां भक्ति और उल्लास में सराबोर होकर आनंद रस में गोते लगा रही हैं।
ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में हर वर्ष की भांति इस बार भी भक्तों के बीच रंगोत्सव का अनूठा नज़ारा देखने को मिल रहा है। जैसे ही ठाकुर बांके बिहारी लाल धवल श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन देने पहुंचे, पूरा मंदिर परिसर 'रास रचैया' की जय-जयकार से गूंज उठा। सेवायत गोस्वामीजन ने भक्तों पर सोने-चांदी की पिचकारियों से टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों की बौछार की।
मंदिर परिसर में चारों ओर अबीर-गुलाल की सातरंगी छटा छाई हुई है। भक्तगण ठाकुरजी की रंग-प्रसादी में भीगकर भक्ति रस में डूब रहे हैं। सेवायतों द्वारा होली के रसिया भजनों का पारंपरिक गायन किया जा रहा है, जिससे वातावरण में भक्ति और मस्ती का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।
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फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी से प्रारंभ हुआ यह आनंदमयी रस वर्षण फाल्गुन पूर्णिमा तक इसी तरह जारी रहेगा। हर भक्त ठाकुरजी के साथ होली खेलने और रंग-प्रसादी का एक कण पाने को लालायित है।
सेवायत गोपी गोस्वामी ने कहा कि बांके बिहारी लाल की यह होली प्रेम और भक्ति का अद्भुत संगम है। हर साल लाखों भक्त इसमें शामिल होकर ठाकुरजी के रंग में रंग जाते हैं। इस बार भी ठाकुरजी अपने भक्तों पर कृपा कर रहे हैं और हर कोई इस अलौकिक रंगोत्सव में डूबा हुआ है। भक्त इस होली में रंगने को आतुर रहते हैं।
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ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में हर वर्ष की भांति इस बार भी भक्तों के बीच रंगोत्सव का अनूठा नज़ारा देखने को मिल रहा है। जैसे ही ठाकुर बांके बिहारी लाल धवल श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन देने पहुंचे, पूरा मंदिर परिसर 'रास रचैया' की जय-जयकार से गूंज उठा। सेवायत गोस्वामीजन ने भक्तों पर सोने-चांदी की पिचकारियों से टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों की बौछार की।
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मंदिर परिसर में चारों ओर अबीर-गुलाल की सातरंगी छटा छाई हुई है। भक्तगण ठाकुरजी की रंग-प्रसादी में भीगकर भक्ति रस में डूब रहे हैं। सेवायतों द्वारा होली के रसिया भजनों का पारंपरिक गायन किया जा रहा है, जिससे वातावरण में भक्ति और मस्ती का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।
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फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी से प्रारंभ हुआ यह आनंदमयी रस वर्षण फाल्गुन पूर्णिमा तक इसी तरह जारी रहेगा। हर भक्त ठाकुरजी के साथ होली खेलने और रंग-प्रसादी का एक कण पाने को लालायित है।
सेवायत गोपी गोस्वामी ने कहा कि बांके बिहारी लाल की यह होली प्रेम और भक्ति का अद्भुत संगम है। हर साल लाखों भक्त इसमें शामिल होकर ठाकुरजी के रंग में रंग जाते हैं। इस बार भी ठाकुरजी अपने भक्तों पर कृपा कर रहे हैं और हर कोई इस अलौकिक रंगोत्सव में डूबा हुआ है। भक्त इस होली में रंगने को आतुर रहते हैं।
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