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आग से गुजर गए श्यामानंद और सुनील पंडा
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Mon, 13 Mar 2017 12:03 AM IST
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काोसी हाोली
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रविवार की रात में भक्त प्रहलाद के जयघोषों से गांव जाव और जटवारी गुंजायमान हो उठे। श्यामानंद दास और सुनील पंडा पलक झपकते ही होली की लपटों के बीच से गुजर गए। गांव में अबीर-गुलाल उड़ाते हुए चौपाइयों का गायन किया गया। आज ब्रज में होरी रे रसिया..., की गूंज सी रही।
पिछले एक माह से अन्न का परित्याग कर श्यामानंद दास जाव के राधा रानी मंदिर में भक्त प्रहलाद की अराधना कर रहा था। रविवार की शाम करीब 6:30 बजे जैसे ही उसे दीपक की लौ ठंडी लगी तो उसने मान लिया कि होलिका से निकलने का समय हो चुका है। श्यामानंद दास मंदिर के निकट बने कुंड की ओर गया।
उसमें स्नान करने के बाद वह 10 मीटर चौड़े अग्नि के घेरे की ओर दौड़ा और पलक झपकते ही उसमें से निकल गया। चहुंओर भक्त प्रहलाद की जय-जयकार होने लगी। ग्रामीणों ने उसे कंधों पर उठा लिया। श्यामानंद दास ने ये कारनामा लगातार नौवीं बार किया है। होली से निकलने के बाद दास को ग्रामीणों ने कंधे पर बैठाकर हुरंगा मैदान का चक्कर लगवाया।
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जटवारी में रात में सुनील पंडा होली की जलती लपटों के मध्य से गुजरा। रात में गांव में रंगारंग कार्यक्रम पेश किए गए।
फालैन में बाबूलाल पंडा ने किया लौ ठंडी होने का इंतजार
फालैन में रविवार को प्रहलाद मंदिर के समीप पांच गांवों की होली की स्थापना मंदिर के सामने बने घेर में की गई। पूरे दिन पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं का जमावड़ा रहा। राजागढ़ी, भीकागढ़ी, सुपाना, नगला मेव आदि गांवों के हुरियारे बड़े-बड़े ढोल-नगाड़े लेकर गांव में चौपाई और होली गायन करते रहे। कोई गली ऐसी नहीं बची, जिसमें हुरियारों के टोल गुलाल उड़ाकर नाचते हुए न दिखाई दे रहे हों।
मंदिर के समीप बने मंच पर गांवों की सरदारी ने हुरियारों को सम्मानित किया। प्रहलाद मंदिर पर पंडा बाबूलाल ग्रामीणों के साथ हवन यज्ञ पर बैठे और दीपक की लौ के ठंडा होने का इंतजार करते रहे। देर शाम गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए। जो देर रात तक जारी थे।
गोमती सरोवर के किनारे स्थित बालाजी मंदिर पर हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। महंत कृष्णमुरारी भारद्वाज ने होली के पर्व के बारे में बताया। कोकिलावन में स्थित बिहारीजी मंदिर में बठैन एवं जाव के ग्रामीणों ने समाज गायन किया। महंत प्रेमदास महाराज ने होली का महत्व इंगित किया।
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पिछले एक माह से अन्न का परित्याग कर श्यामानंद दास जाव के राधा रानी मंदिर में भक्त प्रहलाद की अराधना कर रहा था। रविवार की शाम करीब 6:30 बजे जैसे ही उसे दीपक की लौ ठंडी लगी तो उसने मान लिया कि होलिका से निकलने का समय हो चुका है। श्यामानंद दास मंदिर के निकट बने कुंड की ओर गया।
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उसमें स्नान करने के बाद वह 10 मीटर चौड़े अग्नि के घेरे की ओर दौड़ा और पलक झपकते ही उसमें से निकल गया। चहुंओर भक्त प्रहलाद की जय-जयकार होने लगी। ग्रामीणों ने उसे कंधों पर उठा लिया। श्यामानंद दास ने ये कारनामा लगातार नौवीं बार किया है। होली से निकलने के बाद दास को ग्रामीणों ने कंधे पर बैठाकर हुरंगा मैदान का चक्कर लगवाया।
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जटवारी में रात में सुनील पंडा होली की जलती लपटों के मध्य से गुजरा। रात में गांव में रंगारंग कार्यक्रम पेश किए गए।
फालैन में बाबूलाल पंडा ने किया लौ ठंडी होने का इंतजार
फालैन में रविवार को प्रहलाद मंदिर के समीप पांच गांवों की होली की स्थापना मंदिर के सामने बने घेर में की गई। पूरे दिन पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं का जमावड़ा रहा। राजागढ़ी, भीकागढ़ी, सुपाना, नगला मेव आदि गांवों के हुरियारे बड़े-बड़े ढोल-नगाड़े लेकर गांव में चौपाई और होली गायन करते रहे। कोई गली ऐसी नहीं बची, जिसमें हुरियारों के टोल गुलाल उड़ाकर नाचते हुए न दिखाई दे रहे हों।
मंदिर के समीप बने मंच पर गांवों की सरदारी ने हुरियारों को सम्मानित किया। प्रहलाद मंदिर पर पंडा बाबूलाल ग्रामीणों के साथ हवन यज्ञ पर बैठे और दीपक की लौ के ठंडा होने का इंतजार करते रहे। देर शाम गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए। जो देर रात तक जारी थे।
गोमती सरोवर के किनारे स्थित बालाजी मंदिर पर हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। महंत कृष्णमुरारी भारद्वाज ने होली के पर्व के बारे में बताया। कोकिलावन में स्थित बिहारीजी मंदिर में बठैन एवं जाव के ग्रामीणों ने समाज गायन किया। महंत प्रेमदास महाराज ने होली का महत्व इंगित किया।