{"_id":"09e1321a62789e99b1aec723408b6e1f","slug":"holi-in-brij-hindi-news-8","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोई सुन कर आनंदित, कोई सुना के निहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोई सुन कर आनंदित, कोई सुना के निहाल
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 02 Mar 2016 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
होली की उमंग भी अजीब है। कोई होली गीतों को सुनकर, नाच गाकर आनंदित है तो कोई इन गीतों को सुनाकर खुद को निहाल समझ रहे हैं।
द्वारिकानाथ मंदिर में ब्रज फाग द्वारकेश रसिया मंडल के संस्थापक चुन्नी लाल चौबे साठ के दशक से मंदिर में होली गीतों का गायन करते हैं।
उन्होंने बताया कि होली के गीतों को गाने के बाद आनंद की अनुभूति होती है। होली के गीत दशकों पुराने हैं, लेकिन ये गीत आज की पीढ़ी को भी खूब भाते हैं।
गायन में साथ निभा रहे छोटे लाल चतुर्वेदी कहते हैं ऐसौ ब्रजमंडल कौ ठाकुर तीनों लोकन हूं में नाय...। होली का जो आनंद ब्रज के मंदिरों में है वो कहीं नहीं है। संयोजक प्रमोद चतुर्वेदी ‘पौई’ भी इस गायन मंडली में शामिल हैं और नियमित मंदिर में होली गायन कर रहे हैं।
विज्ञापन
द्वारिकानाथ मंदिर में ब्रज फाग द्वारकेश रसिया मंडल के संस्थापक चुन्नी लाल चौबे साठ के दशक से मंदिर में होली गीतों का गायन करते हैं।
उन्होंने बताया कि होली के गीतों को गाने के बाद आनंद की अनुभूति होती है। होली के गीत दशकों पुराने हैं, लेकिन ये गीत आज की पीढ़ी को भी खूब भाते हैं।
गायन में साथ निभा रहे छोटे लाल चतुर्वेदी कहते हैं ऐसौ ब्रजमंडल कौ ठाकुर तीनों लोकन हूं में नाय...। होली का जो आनंद ब्रज के मंदिरों में है वो कहीं नहीं है। संयोजक प्रमोद चतुर्वेदी ‘पौई’ भी इस गायन मंडली में शामिल हैं और नियमित मंदिर में होली गायन कर रहे हैं।