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आज बिरज में होरी रे रसिया...
अमर उजाला ब्यूरो मथ्ाुरा
Updated Wed, 23 Mar 2016 11:23 PM IST
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चतुर्वेदी समाज के डोले में रंग और गुलाल की मार से भक्त हुए निहाल
- फोटो : अमर उजाला
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हो आज बिरज में होरी रे रसिया, होरी रे रसिया बरजोरी रे रसिया...। माथुर चतुर्वेद परिषद के परंपरागत होली मेला (डोला) के उल्लास में पूरा नगर सराबोर हो गया। होली के गीत, रसिया और भजनों के बीच राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने भक्तों से होली खेली तो आनंद परम आनंद में बदल गया। गुलाल की मार से आसमान सतरंगी हो गया।
परंपरागत होली डोले का शुभारंभ दोपहर बाद विश्राम घाट से हुआ। इस बार रसियाआें के गायन के लिए विभिन्न मंडलियां बुलाई गईं। इस बीच डोले में रथ पर विराजमान राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने गुलाल की मार की तो भक्त निहाल हो गए। मेले का एक आकर्षण युवाओं के लिए तय ड्रेसकोड भी था।
मेले में रसिया और होली गायन के लिए छह ग्रुप बनाए गए। इसमें सीएफसी, आरएफजीसी, एसएफजी, बीआरडी ग्रुप, एसएफसी और टीएफसी ग्रुप रहे। युवाओं के इन ग्रुपों में होली और रसिया गायन की होड़ मच गई।
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गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि चतुर्वेदी समाज इस मेले को अनादिकाल से मना रहा है। महमूद गजनबी के आक्रमण के दौरान भी ये परंपरा जीवित रखी गई। डोला में सर्वप्रथम ढोल, गणेशजी की झांकी, द्वारिकाधीश की झांकी और उसके बाद रथ पर सवार राधा-कृष्ण के स्वरूप भक्तों के साथ होली खेलते चल रहे थे।
इस अवसर पर मुख्य संरक्षक महेश पाठक, अध्यक्ष दिनेश पाठक, नवीन नागर, गिरधारी लाल पाठक, योगेंद्र चतुर्वेदी, अरविंद चतुर्वेदी, राकेश तिवारी, कमल चतुर्वेदी, मुकुंद लाल, नंदलाल, स्वतंत्र चतुर्वेदी, राजीव चतुर्वेदी, अशीष, अजय चतुर्वेदी, अमित आदि शामिल रहे।
विदेशी भक्त भी रंग में सराबोर
डोले में शामिल होने के लिए आए विदेशी भक्त भी गुलाल और रंग की मार से आनंदित हो गए। ब्रज की होली के रंग में रंगे विदेशी श्रद्धालु अपनी सुधबुध भुलाकर प्रभु के भजनों पर नाचने लगे। इस दौरान सभी ने एक दूसरे के गुलाल लगाया और शुभकामनाएं दीं।
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परंपरागत होली डोले का शुभारंभ दोपहर बाद विश्राम घाट से हुआ। इस बार रसियाआें के गायन के लिए विभिन्न मंडलियां बुलाई गईं। इस बीच डोले में रथ पर विराजमान राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने गुलाल की मार की तो भक्त निहाल हो गए। मेले का एक आकर्षण युवाओं के लिए तय ड्रेसकोड भी था।
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मेले में रसिया और होली गायन के लिए छह ग्रुप बनाए गए। इसमें सीएफसी, आरएफजीसी, एसएफजी, बीआरडी ग्रुप, एसएफसी और टीएफसी ग्रुप रहे। युवाओं के इन ग्रुपों में होली और रसिया गायन की होड़ मच गई।
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गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि चतुर्वेदी समाज इस मेले को अनादिकाल से मना रहा है। महमूद गजनबी के आक्रमण के दौरान भी ये परंपरा जीवित रखी गई। डोला में सर्वप्रथम ढोल, गणेशजी की झांकी, द्वारिकाधीश की झांकी और उसके बाद रथ पर सवार राधा-कृष्ण के स्वरूप भक्तों के साथ होली खेलते चल रहे थे।
इस अवसर पर मुख्य संरक्षक महेश पाठक, अध्यक्ष दिनेश पाठक, नवीन नागर, गिरधारी लाल पाठक, योगेंद्र चतुर्वेदी, अरविंद चतुर्वेदी, राकेश तिवारी, कमल चतुर्वेदी, मुकुंद लाल, नंदलाल, स्वतंत्र चतुर्वेदी, राजीव चतुर्वेदी, अशीष, अजय चतुर्वेदी, अमित आदि शामिल रहे।
विदेशी भक्त भी रंग में सराबोर
डोले में शामिल होने के लिए आए विदेशी भक्त भी गुलाल और रंग की मार से आनंदित हो गए। ब्रज की होली के रंग में रंगे विदेशी श्रद्धालु अपनी सुधबुध भुलाकर प्रभु के भजनों पर नाचने लगे। इस दौरान सभी ने एक दूसरे के गुलाल लगाया और शुभकामनाएं दीं।