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ठाकुर बांकेबिहारी संग खेला गुलाल, भक्त निहाल
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Sun, 25 Jan 2015 12:02 AM IST
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वसंत पंचमी पर ठाकुर बांकेबिहारी से गुलाल खेल श्रद्धालु आनंद में सराबोर हो गए। आस्था, उल्लास में गुलाल घुला और प्रसादी अबीर-गुलाल में सराबोर हो हर भक्त इठला उठा। गुलाल के बादलों के बीच बांकेबिहारी लाल के जयकारों से परिसर गुंजायमान रहा।
वसंत पंचमी से शनिवार को ब्रज की परंपरागत होली का भी शुभारंभ हो गया। ठाकुर बांकेबिहारी लाल फेंटा बांधकर तैयार हुए। श्रद्धालुओं ने बांकेबिहारी के दर्शन किए और उनके साथ होली खेली। शृंगार आरती के दर्शनों के उपरांत बांकेबिहारी मंदिर में अबीर-गुलाल के बादल छा गए। मंदिर सेवायतों की ओर से सुगंधित अबीर-गुलाल श्रद्धालुओं पर उड़ाया गया।
श्रद्धालुओं में होड़ लग गई कि कौन ज्यादा से ज्यादा प्रसादी अबीर-गुलाल अपने शरीर पर डलवा लेता है। बांके बिहारी के दर्शनों से भी ज्यादा। सेवायत गोस्वामी कन्हैयालाल गोस्वामी ने बताया कि ब्रज की परंपरागत होली की शुरुआत वसंत पंचमी से होती है। रंगभरनी एकादशी आते ही होली का रंग चरम पर होता है। आचार्य गोपी गोस्वामी, अरविंद गोस्वामी, विद्याभूषण गोस्वामी, श्रीनाथ गोस्वामी, अभाष गोस्वामी, विभु गोस्वामी उपस्थित रहे।
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उड़त गुलाल लाल भये बदरा...
वसंत पंचमी पर ठाकुर श्री बांकेबिहारी मंदिर में उड़ रहे गुलाल ने प्रसिद्ध कवि गोपाल प्रसाद उपाध्याय के गीत की पंक्तियों ‘उड़त गुलाल लाल भये बदरा...’ को चरितार्थ किया। मंदिर में अबीर-गुलाल के बादल छाए थे। इंद्रधनुषी छटा से सभी अभिभूत दिखे। अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने को देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
धर्मनगरी के मंदिरों में होली का शुभारंभ
वसंत पंचमी पर ब्रज में होली का डाढ़ा गड़ने के साथ राधावल्लभ मंदिर, राधा दामोदर, सेवाकुंज मंदिर, यशोदानंदन मंदिर आदि में फागुन का उत्सव प्रारंभ हो गया।
आनंद में सराबोर होने लगी कतार
वसंत पंचमी पर ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की होली का आनंद लेने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचे। दिल्ली से परिवार के साथ आईं पूनम और बबिता ने बताया कि वह कई वर्षों से परिवार के साथ वसंत पंचमी पर बांके बिहारी महाराज के दर्शनों के लिए आ रही हैं। ब्रज की होली का अपना अलग ही आनंद है। फरीदाबाद निवासी आशुतोष भी परिवार के साथ बांके बिहारी मंदिर पहुंचे और अपने आराध्य के साथ होली के आनंद का अनुभव किया।
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वसंत पंचमी से शनिवार को ब्रज की परंपरागत होली का भी शुभारंभ हो गया। ठाकुर बांकेबिहारी लाल फेंटा बांधकर तैयार हुए। श्रद्धालुओं ने बांकेबिहारी के दर्शन किए और उनके साथ होली खेली। शृंगार आरती के दर्शनों के उपरांत बांकेबिहारी मंदिर में अबीर-गुलाल के बादल छा गए। मंदिर सेवायतों की ओर से सुगंधित अबीर-गुलाल श्रद्धालुओं पर उड़ाया गया।
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श्रद्धालुओं में होड़ लग गई कि कौन ज्यादा से ज्यादा प्रसादी अबीर-गुलाल अपने शरीर पर डलवा लेता है। बांके बिहारी के दर्शनों से भी ज्यादा। सेवायत गोस्वामी कन्हैयालाल गोस्वामी ने बताया कि ब्रज की परंपरागत होली की शुरुआत वसंत पंचमी से होती है। रंगभरनी एकादशी आते ही होली का रंग चरम पर होता है। आचार्य गोपी गोस्वामी, अरविंद गोस्वामी, विद्याभूषण गोस्वामी, श्रीनाथ गोस्वामी, अभाष गोस्वामी, विभु गोस्वामी उपस्थित रहे।
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उड़त गुलाल लाल भये बदरा...
वसंत पंचमी पर ठाकुर श्री बांकेबिहारी मंदिर में उड़ रहे गुलाल ने प्रसिद्ध कवि गोपाल प्रसाद उपाध्याय के गीत की पंक्तियों ‘उड़त गुलाल लाल भये बदरा...’ को चरितार्थ किया। मंदिर में अबीर-गुलाल के बादल छाए थे। इंद्रधनुषी छटा से सभी अभिभूत दिखे। अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने को देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
धर्मनगरी के मंदिरों में होली का शुभारंभ
वसंत पंचमी पर ब्रज में होली का डाढ़ा गड़ने के साथ राधावल्लभ मंदिर, राधा दामोदर, सेवाकुंज मंदिर, यशोदानंदन मंदिर आदि में फागुन का उत्सव प्रारंभ हो गया।
आनंद में सराबोर होने लगी कतार
वसंत पंचमी पर ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की होली का आनंद लेने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचे। दिल्ली से परिवार के साथ आईं पूनम और बबिता ने बताया कि वह कई वर्षों से परिवार के साथ वसंत पंचमी पर बांके बिहारी महाराज के दर्शनों के लिए आ रही हैं। ब्रज की होली का अपना अलग ही आनंद है। फरीदाबाद निवासी आशुतोष भी परिवार के साथ बांके बिहारी मंदिर पहुंचे और अपने आराध्य के साथ होली के आनंद का अनुभव किया।