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Mathura News: कैलिफोर्निया में रहने वाले हिमांशु का वृंदावन के लिए धड़कता है दिल
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हिंमाशु गुप्ता
- फोटो : mathura
मथुरा। वृंदावन के पत्थरपुरा निवासी पर्यावरणविद व उद्यमी हिमांशु गुप्ता को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस समारोह में गौरव सम्मान से नवाजा जाएगा। वह फिलहाल अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में रहते हैं, लेकिन देश व वृंदावन-मथुरा के लिए उनका दिल आज भी धड़कता है।
उन्होंने बताया है कि आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की। यहां उन्होंने अपने दोस्तों के साथ किसानों व पर्यावरण के हित में कई प्रयोग किए। राइस ट्रांसप्लांट मशीन उनमें एक है। इसके बाद बढ़ती तकनीकी के दौर में उन्होंने अमेरिका में क्लाईमेट एआई कंपनी की शुरुआत की। यह तकनीक कृषि सुधार के साथ-साथ पर्यावरण के क्षेत्र बदलाव में अहम मानी जा रही है। भारत समेत दुनिया भर के 1.5 करोड़ किसान इसी तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। यह तकनीक भूमि के हिसाब से उन्नत में कारगर साबित हो रही है।
पर्यावरणविद हिमांशु गुप्ता से फोन पर हुई बातचीत में बताया है कि वृंदावन में उनके पिता राजेंद्र कुमार गुप्ता की मिठाई की दुकान है। उन्होंने 9वीं कक्षा तक यहीं पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 10वीं और 12वीं की दिल्ली में शिक्षा ली। इसी बीच आईआईटी में दाखिल होने के बाद वह इंजीनियरिंग करने खड़गपुर पहुंच गए। यहां उन्होंने नित नए प्रयोग किए।
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इसके बाद अमेरिका चले गए। यहां उन्होंने अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति एलगोर के साथ पर्यावरण और कृषि क्षेत्र में अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने क्लाईमेट एआई कंपनी शुरू की। उन्होंने बताया है कि क्लाईमेट एआई की तकनीक किसानों को यह जानकारी दे सकती है कि कौनसी भूमि पर किस फसल की पैदावार ज्यादा होगी। साथ ही हीटवेट व मौसम का पूर्वानुमान के बारे में संकेतक करेगी।
इन देशों में हो रहा उपयोग
हिमांशु ने बताया है कि अभी फिलहाल इस तकनीक का कई देशों के 1.5 करोड़ किसान उपयोग कर रहे हैं। वहीं भारत के करीब 15 लाख किसान भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने बताया है कि अब वह इसी प्रोजेक्ट को चार देशों की सरकारों के साथ धरातल पर उतारने की तैयारी में है। इसमें भारत और अमेरिका समेत अन्य दो देश शामिल हैं। उन्होंने बताया है कि वह अपने देश को हमेशा याद करते हैं। इस क्षेत्र में देश हित में भी वह काम करना चाहते हैं। वृंदावन-मथुरा के लिए उनका दिल आज भी धड़कता है।
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उन्होंने बताया है कि आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की। यहां उन्होंने अपने दोस्तों के साथ किसानों व पर्यावरण के हित में कई प्रयोग किए। राइस ट्रांसप्लांट मशीन उनमें एक है। इसके बाद बढ़ती तकनीकी के दौर में उन्होंने अमेरिका में क्लाईमेट एआई कंपनी की शुरुआत की। यह तकनीक कृषि सुधार के साथ-साथ पर्यावरण के क्षेत्र बदलाव में अहम मानी जा रही है। भारत समेत दुनिया भर के 1.5 करोड़ किसान इसी तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। यह तकनीक भूमि के हिसाब से उन्नत में कारगर साबित हो रही है।
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पर्यावरणविद हिमांशु गुप्ता से फोन पर हुई बातचीत में बताया है कि वृंदावन में उनके पिता राजेंद्र कुमार गुप्ता की मिठाई की दुकान है। उन्होंने 9वीं कक्षा तक यहीं पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 10वीं और 12वीं की दिल्ली में शिक्षा ली। इसी बीच आईआईटी में दाखिल होने के बाद वह इंजीनियरिंग करने खड़गपुर पहुंच गए। यहां उन्होंने नित नए प्रयोग किए।
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इसके बाद अमेरिका चले गए। यहां उन्होंने अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति एलगोर के साथ पर्यावरण और कृषि क्षेत्र में अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने क्लाईमेट एआई कंपनी शुरू की। उन्होंने बताया है कि क्लाईमेट एआई की तकनीक किसानों को यह जानकारी दे सकती है कि कौनसी भूमि पर किस फसल की पैदावार ज्यादा होगी। साथ ही हीटवेट व मौसम का पूर्वानुमान के बारे में संकेतक करेगी।
इन देशों में हो रहा उपयोग
हिमांशु ने बताया है कि अभी फिलहाल इस तकनीक का कई देशों के 1.5 करोड़ किसान उपयोग कर रहे हैं। वहीं भारत के करीब 15 लाख किसान भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने बताया है कि अब वह इसी प्रोजेक्ट को चार देशों की सरकारों के साथ धरातल पर उतारने की तैयारी में है। इसमें भारत और अमेरिका समेत अन्य दो देश शामिल हैं। उन्होंने बताया है कि वह अपने देश को हमेशा याद करते हैं। इस क्षेत्र में देश हित में भी वह काम करना चाहते हैं। वृंदावन-मथुरा के लिए उनका दिल आज भी धड़कता है।