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Mathura News: साध्वी के जन्मोत्सव पर वात्सल्य ग्राम में खुशियों की बहार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 31 Dec 2023 12:27 AM IST
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Happiness flows in Vatsalya village on Sadhvi's birth anniversary
कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अ​भिनंदन करतीं साध्वी ऋतंभरा
वृंदावन। साध्वी ऋतंभरा के 60वें जन्मोत्सव पर मनाए जा रहे षष्ठीपूर्ति महोत्सव पर शनिवार को वात्सल्य ग्राम खुशियों से सराबोर नजर आया। द्वार से लेकर हवन यज्ञ, पंडाल पूरा आयोजन स्थल भगवा झंडियों सजा था। देशभर से आए हजारों भक्तोें ने संतों का सानिध्य प्राप्त कर खुद को कृतार्थ किया। चहुंओर जय श्रीराम और भारत माता के उद्घोष सुनाई दे रहे थे। एक तरफ राजनीतिक एवं आध्यात्म जगत की हस्तियां संबोधित कर रही थीं, वहीं दूसरी तरफ वेद ऋचाओं के साथ हवन में आहुतियां दी जा रही थी। ब्राह्मण भोज कर रहे थे। वात्सल्य ग्राम की बेटियां भी महोत्सव को लेकर उत्साहित थीं। शाम को लोक गायिका मालिनी अवस्थी और पूर्णिमा दीदी ने स्वर लहरियां बिखेरी तो श्रोता झूम उठे।
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सुबह सर्वमंगला पीठम के पास बने भव्य यज्ञ स्थल पर याज्ञिक रत्न विष्णुकांत शास्त्री महाराज के आचार्यत्व में श्री शिव शक्ति महायज्ञ और देवी देवताओं का विधिविधान से पूजन किया गया। इसके बाद पांच कुंडीय हवन शुरू हुआ। इसमें 30 पंडितों व देश-विदेश से आए 60 दंपतियों ने मंत्रोच्चारों के बीच आहुतियां दी। हवन सुबह दस बजे से दोपहर 12 बजे तक चला। इससे पहले दो घंटे पूजन किया गया। षष्ठी पूर्ति महोत्सव पर ब्राह्मण भोज का आयोजन किया गया। वृंदावन और सुदूर क्षेत्रों से आए 1100 ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ ही उन्हें दक्षिणा दी गईं।
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रामजी के भईले जनमवा चलहु...
दुल्हन की तरह सजे-धजे वात्सल्य ग्राम में दिनभर उल्लास छाया रहा। शाम को पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी और भजन गायिका साध्वी पूर्णिमा पूनम दीदी ने भजनों की तान छेड़ भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। पारंपरिक वस्त्रों में अपने चिरपरिचित अंदाज में मालिनी अवस्थी ने लोक गीत रामजी के भईले जनमवा चलहु, करि आईवा दर्शन वा, बारी उमरिया व्याह के आई हरि मैं भोली सइयां नादान... प्रस्तुत कर समा बांध दिया। साध्वी पूर्णिमा ने मुझे अपने ही रंग में रंग ले.., मैं जहां भी रहूं बरसाना मिले..., छाए काली घटाएं तो क्या..., हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणोें में..., मेरे बांकेबिहारी पिया चुरा लिया दिल मेरा आदि . भजन सुनाकर सभी को भक्ति के रंग में रंग दिया। हर कोई अपने स्थान से उठकर भाव विभोर होकर नाचने लगा। यह सिलसिला देर रात चला, जिसमें में लोग जमे रहे।
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