{"_id":"596e2fc14f1c1b9b3b8b483a","slug":"hanging-police-in-identifying-dead-killers-in-jawahar-bagh","type":"story","status":"publish","title_hn":"जवाहर बाग कांड के बाद लापरवाह यूपी पुलिस का बड़ा कारनामा, जानकर हो जाएंगे हैरान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जवाहर बाग कांड के बाद लापरवाह यूपी पुलिस का बड़ा कारनामा, जानकर हो जाएंगे हैरान
ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
Updated Tue, 18 Jul 2017 09:26 PM IST
विज्ञापन
जवाहर बाग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जवाहर बाग की हिंसा में मारे गए 27 कब्जाधारियों की पहचान को लेकर पुलिस फंस रही है। सीबीआई ने माना है कि पुलिस ने शिनाख्त के प्रयास ही नहीं किए। जवाहर बाग में रहने वाले लोग कुछ ही जिलों के थे। कोशिश होती तो सभी की शिनाख्त करा ली गई होती। पुलिस ने दूसरे जिलों में जाकर पंफलेट तक नहीं लगाए।
मथुरा के जवाहर बाग में 2 जून 2016 को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। जो 27 कब्जाधारी मरे उनमें से अधिकांश की मौत जलने से हुई। सभी के चेहरे बुरी तरह से बिगड़ गए थे। पुलिस ने शव कुछ दिन पोस्टमार्टम हाउस पर रखे। बाद में अंतिम संस्कार करा दिया।
रामवृक्ष यादव समेत दो लोगों की शिनाख्त तो हो गई थी लेकिन पुलिस के पास इनकी मौत का कोई वैज्ञानिक आधार अभी तक नहीं है। रामवृक्ष यादव का तो डीएनए सैंपल का ही मिलान नहीं हो पाया है। इस हिंसा की जांच कर सीबीआई ने सभी कब्जाधारियों का रिकार्ड पुलिस से मांगा लेकिन पुलिस के पास कुछ नहीं है।
विज्ञापन
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन लोगों की शिनाख्त होगी कैसे। सीबीआई जेल में बंद लोगों से पूछ रही है कि जवाहर बाग में किस-किस जिले के लोग थे। वहां जाकर जानकारी जुटाई जाएगी कि उस जिले का कोई व्यक्ति गायब तो नहीं है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जो जांच रिपोर्ट तैयार कर रही है उसमें भी पुलिस वालों की लापरवाही को इंगित किया जा रहा है।
अफसरों से की गई पूछताछ
सीबीआई ने मंगलवार को पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से फिर पूछताछ की। सुबह ही सभी को गेस्ट हाउस में बुला लिया था। वह डाक्टर भी थे जिन लोगों ने घायल कब्जाधारियों का उपचार किया था।
विज्ञापन
मथुरा के जवाहर बाग में 2 जून 2016 को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। जो 27 कब्जाधारी मरे उनमें से अधिकांश की मौत जलने से हुई। सभी के चेहरे बुरी तरह से बिगड़ गए थे। पुलिस ने शव कुछ दिन पोस्टमार्टम हाउस पर रखे। बाद में अंतिम संस्कार करा दिया।
विज्ञापन
रामवृक्ष यादव समेत दो लोगों की शिनाख्त तो हो गई थी लेकिन पुलिस के पास इनकी मौत का कोई वैज्ञानिक आधार अभी तक नहीं है। रामवृक्ष यादव का तो डीएनए सैंपल का ही मिलान नहीं हो पाया है। इस हिंसा की जांच कर सीबीआई ने सभी कब्जाधारियों का रिकार्ड पुलिस से मांगा लेकिन पुलिस के पास कुछ नहीं है।
विज्ञापन
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन लोगों की शिनाख्त होगी कैसे। सीबीआई जेल में बंद लोगों से पूछ रही है कि जवाहर बाग में किस-किस जिले के लोग थे। वहां जाकर जानकारी जुटाई जाएगी कि उस जिले का कोई व्यक्ति गायब तो नहीं है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जो जांच रिपोर्ट तैयार कर रही है उसमें भी पुलिस वालों की लापरवाही को इंगित किया जा रहा है।
अफसरों से की गई पूछताछ
सीबीआई ने मंगलवार को पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से फिर पूछताछ की। सुबह ही सभी को गेस्ट हाउस में बुला लिया था। वह डाक्टर भी थे जिन लोगों ने घायल कब्जाधारियों का उपचार किया था।