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एक पिता एकऊ के सब बंदे...
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 25 Nov 2015 06:10 PM IST
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सिक्खों के प्रथम गुरु नानक देव की जयंती धर्मनगरी में भी प्रकाशोत्सव के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर गुरुनानक टीला स्थित गुरुद्वारे में सबद कीर्तन का आयोजन हुआ।
ज्ञानी और साधु संगत ने दिनभर संकीर्तन कर गुरुनानक देव की अर्चना की। कार्यक्रम में सिख समाज ने सहभागिता की और गुरु नानकदेव के आदर्शों पर चलने संकल्प लिया।
किशोरपुरा स्थित गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी परमजीत सिंह ने संगीत की धुन पर ज्ञान और भक्ति का मार्ग बताते हुए सबद कीर्तन कराया। उन्होंने ‘एक पिता एकऊ के सब बंदे...’, ‘तुमसे गुरुभाई इस जग में सब बंदे...’ कीर्तन गाए।
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उन्होंने बताया कि गुरु नानकदेव जब वृंदावन आए तो वह इसी टीले पर आकर रहे थे। उन्होंने यहीं से राधा-कृष्ण के दर्शन किए और अपने को धन्य पाया। तभी से उनके मन में ब्रजभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा उत्पन्न हुई।
इसलिए गुरुवाणी में ब्रज भाषा के शब्द भी मिलते हैं। इस अवसर पर सहायक ग्रंथी मान सिंह, ब्रजेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, रघुनंदन अरोड़ा आदि उपस्थित थे।
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ज्ञानी और साधु संगत ने दिनभर संकीर्तन कर गुरुनानक देव की अर्चना की। कार्यक्रम में सिख समाज ने सहभागिता की और गुरु नानकदेव के आदर्शों पर चलने संकल्प लिया।
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किशोरपुरा स्थित गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी परमजीत सिंह ने संगीत की धुन पर ज्ञान और भक्ति का मार्ग बताते हुए सबद कीर्तन कराया। उन्होंने ‘एक पिता एकऊ के सब बंदे...’, ‘तुमसे गुरुभाई इस जग में सब बंदे...’ कीर्तन गाए।
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उन्होंने बताया कि गुरु नानकदेव जब वृंदावन आए तो वह इसी टीले पर आकर रहे थे। उन्होंने यहीं से राधा-कृष्ण के दर्शन किए और अपने को धन्य पाया। तभी से उनके मन में ब्रजभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा उत्पन्न हुई।
इसलिए गुरुवाणी में ब्रज भाषा के शब्द भी मिलते हैं। इस अवसर पर सहायक ग्रंथी मान सिंह, ब्रजेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, रघुनंदन अरोड़ा आदि उपस्थित थे।