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टटीया स्थान के आसपास दूषित हो रहा है भूगर्भ जल
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मथुरा। परिक्रमा मार्ग स्थित टटिया स्थान गोशाला के पीछे भरा हुआ नाले का गंदा पानी।
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन। स्वामी हरिदास जी की भजन स्थली टटीया स्थान के आसपास क्षेत्र का भूगर्भ जल पर संकट के बादल छा रहे हैं। इस क्षेत्र में भूगर्भ जल दूषित होने लगा है। इसका कारण नगरीय क्षेत्र के नालों का गंदा पानी यहां बड़े इलाके में एकत्रित होना है।
वृंदावन परिक्रमा मार्ग क्षेत्र से जुड़े टटीया स्थान की गोशाला के निकट बड़े क्षेत्र में गांधी पार्क नाले के पानी ने तालाब का रूप ले लिया है। करीब 150 मीटर के दायरे में फैला यह पानी क्षेत्रीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है, जो विजय कौशल महाराज के आश्रम तक पहुंच रहा है। पिछले करीब सात साल से गंदा पानी एक ही स्थान पर भरे होने के कारण यहां आसपास भूगर्भ जल दूषित होने लगा है।
टटीया स्थान और गोशाला के पानी का स्वाद तेजी बदल रहा है। इससे यहां के संत भी चिंतित हैं। यही स्थित आसपास चेतन्यकुटी, मलूकपीठ गोशाला का भी है।
मंत्री और विधायक ने भी देखी समस्या
गांधी पार्क नाले के गंदे पानी से उत्पन्न हो रही इस समस्या को क्षेत्रीय विधायक और ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा देख चुके हैं। जल निगम के अधिकारी और उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अधिकारियों ने भी इससे निपटने के लिए मौका मुआयना भी किया है। ऊर्जामंत्री के निर्देश पर जल निगम और नगर निगम ने करीब दो माह तक तो गंदे पानी के बहाव को तीन साल पहले बदला था, लेकिन स्थितियां एक बार फिर पूर्ववर्ती हो गई हैं।
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वृंदावन परिक्रमा मार्ग क्षेत्र से जुड़े टटीया स्थान की गोशाला के निकट बड़े क्षेत्र में गांधी पार्क नाले के पानी ने तालाब का रूप ले लिया है। करीब 150 मीटर के दायरे में फैला यह पानी क्षेत्रीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है, जो विजय कौशल महाराज के आश्रम तक पहुंच रहा है। पिछले करीब सात साल से गंदा पानी एक ही स्थान पर भरे होने के कारण यहां आसपास भूगर्भ जल दूषित होने लगा है।
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टटीया स्थान और गोशाला के पानी का स्वाद तेजी बदल रहा है। इससे यहां के संत भी चिंतित हैं। यही स्थित आसपास चेतन्यकुटी, मलूकपीठ गोशाला का भी है।
मंत्री और विधायक ने भी देखी समस्या
गांधी पार्क नाले के गंदे पानी से उत्पन्न हो रही इस समस्या को क्षेत्रीय विधायक और ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा देख चुके हैं। जल निगम के अधिकारी और उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अधिकारियों ने भी इससे निपटने के लिए मौका मुआयना भी किया है। ऊर्जामंत्री के निर्देश पर जल निगम और नगर निगम ने करीब दो माह तक तो गंदे पानी के बहाव को तीन साल पहले बदला था, लेकिन स्थितियां एक बार फिर पूर्ववर्ती हो गई हैं।
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