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मूल गर्भगृह पर ही बनेगा श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर: महेंद्र प्रताप
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वृंदावन। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण में हिंदू पक्षकार एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर उसी मूल गर्भगृह स्थल पर बनाया जाएगा जिसे हिंदू पक्ष भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मानता है। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष किसी नई या वैकल्पिक भूमि की मांग नहीं कर रहा है बल्कि मूल गर्भगृह स्थल को लेकर न्यायिक लड़ाई लड़ रहा है।
वृंदावन के शांति कुंज में चल रही भागवत कथा में रविवार को भक्तों को संबोधित करते हुए महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विवादित परिसर की करीब ढाई एकड़ भूमि ही वह स्थान है, जिसे हिंदू पक्ष श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मूल स्थल मानता है। इसी भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर स्थापित करने की मांग की जा रही है। भागवताचार्य राकेशाचार्य की कथा के दौरान महेंद्र प्रताप सिंह ने श्रद्धालुओं से संवाद किया। उन्होंने जन्मभूमि के इतिहास का उल्लेख करते हुए दावा किया कि मंदिर को कई बार तोड़ा गया। अंतिम बार औरंगजेब के समय मंदिर को ध्वस्त कर मूल गर्भगृह पर मस्जिद का निर्माण कराया गया। महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विभिन्न स्थानों से श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित दस्तावेज जुटाए गए हैं। इनको न्यायालय के समक्ष रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि राजस्व अभिलेखों में शाही ईदगाह मस्जिद का नाम दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन है और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही इसका समाधान होना चाहिए।
जामा मस्जिद की सीढि़यों में दबे विग्रहों का उल्लेख किया
उन्होंने मथुरा से भगवान श्रीकृष्ण के विग्रहों को आगरा ले जाए जाने और जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगाए जाने के दावे का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि ऐतिहासिक स्थलों और विग्रहों से जुड़े मामलों में भी न्यायालय के माध्यम से अपना पक्ष रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जन्मभूमि मामले को लेकर उन्हें धमकियां भी मिलीं लेकिन वह अपने संकल्प से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि वह कानूनी तरीके से लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने देश-विदेश में हिंदू समाज को जागरूक करने के अभियान का भी जिक्र किया।
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वृंदावन के शांति कुंज में चल रही भागवत कथा में रविवार को भक्तों को संबोधित करते हुए महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विवादित परिसर की करीब ढाई एकड़ भूमि ही वह स्थान है, जिसे हिंदू पक्ष श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मूल स्थल मानता है। इसी भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर स्थापित करने की मांग की जा रही है। भागवताचार्य राकेशाचार्य की कथा के दौरान महेंद्र प्रताप सिंह ने श्रद्धालुओं से संवाद किया। उन्होंने जन्मभूमि के इतिहास का उल्लेख करते हुए दावा किया कि मंदिर को कई बार तोड़ा गया। अंतिम बार औरंगजेब के समय मंदिर को ध्वस्त कर मूल गर्भगृह पर मस्जिद का निर्माण कराया गया। महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विभिन्न स्थानों से श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित दस्तावेज जुटाए गए हैं। इनको न्यायालय के समक्ष रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि राजस्व अभिलेखों में शाही ईदगाह मस्जिद का नाम दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन है और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही इसका समाधान होना चाहिए।
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जामा मस्जिद की सीढि़यों में दबे विग्रहों का उल्लेख किया
उन्होंने मथुरा से भगवान श्रीकृष्ण के विग्रहों को आगरा ले जाए जाने और जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगाए जाने के दावे का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि ऐतिहासिक स्थलों और विग्रहों से जुड़े मामलों में भी न्यायालय के माध्यम से अपना पक्ष रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जन्मभूमि मामले को लेकर उन्हें धमकियां भी मिलीं लेकिन वह अपने संकल्प से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि वह कानूनी तरीके से लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने देश-विदेश में हिंदू समाज को जागरूक करने के अभियान का भी जिक्र किया।
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