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Mathura News: दो जनवरी को भगवान के साथ बैकुंठ द्वार से निकलेंगे भक्त
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वृंदावन। रंगनाथ मंदिर में 2 जनवरी को बैकुंठ एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। बैकुंठ द्वार से निकलने की कामना को लेकर देश-विदेश से भक्त यहां पहुंचेंगे। मंदिर में इसकी तैयारियां शुरू हो गईं हैं।
बृहस्पतिवार को मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि रंगनाथ मंदिर में बैकुंठ द्वार पौष माह की बैकुंठ एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में खोला जाता है। शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन खुलने वाले इस द्वार से निकलने के लिए भक्त लालायित रहते हैं। भक्त जयकारे लगाते हुए भगवान रंगनाथ की सवारी के साथ इस द्वार से निकलते हैं। उत्सव के लिए मंदिर में तैयारी शुरू हो गई हैं। मंदिर में बैकुंठ द्वार के पास मंडप बनाया जा रहा है। इसमें देसी-विदेशी फूल लगाए जाएंगे। बैकुंठ लोक की साफ सफाई की जा रही है।
पुजारी राजू स्वामी ने बताया कि उत्सव 21 दिन तक मनाया जाता है। बैकुंठ एकादशी से 10 दिन पहले और दस दिन बाद तक। उत्सव के 11 वें दिन बैकुंठ एकादशी पर्व पर बैकुंठ द्वार खोला जाता है। इस द्वार से निकलकर भगवान अपने बैकुंठ धाम को प्रस्थान करते हैं। इसी कामना को लिए भक्त भी बैकुंठ एकादशी पर भगवान की सवारी के पीछे निकलते हैं और बैकुंठ धाम की प्राप्ति की कामना करते हैं। बताया कि आचार्य अपनी रचित गाथा भगवान को सुनाते हैं।
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बृहस्पतिवार को मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि रंगनाथ मंदिर में बैकुंठ द्वार पौष माह की बैकुंठ एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में खोला जाता है। शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन खुलने वाले इस द्वार से निकलने के लिए भक्त लालायित रहते हैं। भक्त जयकारे लगाते हुए भगवान रंगनाथ की सवारी के साथ इस द्वार से निकलते हैं। उत्सव के लिए मंदिर में तैयारी शुरू हो गई हैं। मंदिर में बैकुंठ द्वार के पास मंडप बनाया जा रहा है। इसमें देसी-विदेशी फूल लगाए जाएंगे। बैकुंठ लोक की साफ सफाई की जा रही है।
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पुजारी राजू स्वामी ने बताया कि उत्सव 21 दिन तक मनाया जाता है। बैकुंठ एकादशी से 10 दिन पहले और दस दिन बाद तक। उत्सव के 11 वें दिन बैकुंठ एकादशी पर्व पर बैकुंठ द्वार खोला जाता है। इस द्वार से निकलकर भगवान अपने बैकुंठ धाम को प्रस्थान करते हैं। इसी कामना को लिए भक्त भी बैकुंठ एकादशी पर भगवान की सवारी के पीछे निकलते हैं और बैकुंठ धाम की प्राप्ति की कामना करते हैं। बताया कि आचार्य अपनी रचित गाथा भगवान को सुनाते हैं।
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