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ब्रज में घेवर और फैनी के कारोबार पर कोरोना संक्रमण का साया
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घेवर बनाते हुए कारीगर।
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। ब्रज में मिठाई खाने और खिलाने का बहुत पुरानी रिवाज है। लोग खुद भी मीठा खाते हैं और दूसरों को भी खूब मिठाई खिलाई जाती है। ब्रज में रक्षाबंधन पर घेवर और फैनी खाने खिलाने की परंपरा है। रक्षाबंधन पर बहनें राखी बांधने के बाद अपने भाइयों को घेवर खिलाती हैं।
घेवर मूलत: ब्रज की ही मिठाई है और ब्रज क्षेत्र में ही इसका प्रचलन ज्यादा है। आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, हाथरस और एटा तक घेवर खूब खाया जाता है, लेकिन इसके अलावा तो इसके दर्शन ही दुर्लभ हो जाते हैं। शादी-ब्याह में तो घेवर आम बात है, लेकिन दुकानों पर यह केवल सावन-भादों में ही मिलता है। रक्षाबंधन पर्व पर बिकने वाली यह मिठाई भी कोरोना का संक्रमण लग गया है। इस साल घेवर की बिक्री घटकर आधी हो गई है।
मलाईदार व सादा घेवर 300 रुपये किलो बिक रहा है, तो मिनी घेवर 350 रुपये किलो है। उससे भी छोटा घेवर 360 रुपये किलो है। मीठी फैनी 280 और दूध फैनी 300 रुपये किलो के भाव पर बिक रही है।
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राजीव ब्रजवासी ने बताया कि पिछले साल तक कई दिन पूर्व ही घेवर की डिमांड आ जाया करती थी और रक्षाबंधन पर दुकान पर लाइन लगाकर घेवर की बिक्री होती थी, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण का असर घेवर की बिक्री पर पड़ा है।
धौलीप्याऊ स्थित रमन मिठाई वालों ने बताया एक अनुमान के अनुसार सावन-भादों में जनपद में करीब 10 हजार किलो घेवर बिक जाता था, लेकिन इस बार आधा भी बाजार नहीं है।
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घेवर मूलत: ब्रज की ही मिठाई है और ब्रज क्षेत्र में ही इसका प्रचलन ज्यादा है। आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, हाथरस और एटा तक घेवर खूब खाया जाता है, लेकिन इसके अलावा तो इसके दर्शन ही दुर्लभ हो जाते हैं। शादी-ब्याह में तो घेवर आम बात है, लेकिन दुकानों पर यह केवल सावन-भादों में ही मिलता है। रक्षाबंधन पर्व पर बिकने वाली यह मिठाई भी कोरोना का संक्रमण लग गया है। इस साल घेवर की बिक्री घटकर आधी हो गई है।
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मलाईदार व सादा घेवर 300 रुपये किलो बिक रहा है, तो मिनी घेवर 350 रुपये किलो है। उससे भी छोटा घेवर 360 रुपये किलो है। मीठी फैनी 280 और दूध फैनी 300 रुपये किलो के भाव पर बिक रही है।
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राजीव ब्रजवासी ने बताया कि पिछले साल तक कई दिन पूर्व ही घेवर की डिमांड आ जाया करती थी और रक्षाबंधन पर दुकान पर लाइन लगाकर घेवर की बिक्री होती थी, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण का असर घेवर की बिक्री पर पड़ा है।
धौलीप्याऊ स्थित रमन मिठाई वालों ने बताया एक अनुमान के अनुसार सावन-भादों में जनपद में करीब 10 हजार किलो घेवर बिक जाता था, लेकिन इस बार आधा भी बाजार नहीं है।