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धुएं में एनजीटी का आदेश
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Fri, 21 Aug 2015 10:34 PM IST
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने वृंदावन नगर क्षेत्र और यमुना के घाटों पर घरेलू कचरा और मलबा जलाने पर रोक लगा रखी है। इसके बाद भी धर्मनगरी में जगह-जगह कूड़ा-कचरा से धुआं उठता देखा जा सकता है। मामले में जिम्मेदार नगर पालिका और एमवीडीए को भी ट्रिब्यूनल के आदेश की परवाह नहीं है।
बता दें कि मई माह में सामाजिक कार्यकर्ता मधुमंगल शुक्ला की याचिका पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने नगर पालिका और एमवीडीए को निर्देश दिए थे। इसमें नगर क्षेत्र और यमुना के घाटों के आसपास किसी भी प्रकार के कचरा जलाने पर रोक लगाने की बात कही थी।
इसके साथ ही यमुना किनारे और घाटों के आसपास मलबा डालने पर रोक लगाने का आदेश भी शामिल था। आदेश के लगभग दो माह बाद याची मधुमंगल शुक्ला का कहना है कि आज भी नगर में घरेलू कचरे को खुले में जलाकर निस्तारित किया जा रहा है।
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इससे प्रदूषण और बीमारी फैल रही हैं। नगर पालिका को भी एनजीटी के आदेशों की परवाह नहीं है। नगर के मलबे और कचरे की समस्या कैसे निपटाई जाए इसकी भी कोई योजना नहीं है। शुक्ला का कहना है कि लगभग आधा मलबा नगर के विभिन्न क्षेत्रों में जला दिया जाता है। बाकी यमुना नदी किनारे डाल दिया जाता है।
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बता दें कि मई माह में सामाजिक कार्यकर्ता मधुमंगल शुक्ला की याचिका पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने नगर पालिका और एमवीडीए को निर्देश दिए थे। इसमें नगर क्षेत्र और यमुना के घाटों के आसपास किसी भी प्रकार के कचरा जलाने पर रोक लगाने की बात कही थी।
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इसके साथ ही यमुना किनारे और घाटों के आसपास मलबा डालने पर रोक लगाने का आदेश भी शामिल था। आदेश के लगभग दो माह बाद याची मधुमंगल शुक्ला का कहना है कि आज भी नगर में घरेलू कचरे को खुले में जलाकर निस्तारित किया जा रहा है।
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इससे प्रदूषण और बीमारी फैल रही हैं। नगर पालिका को भी एनजीटी के आदेशों की परवाह नहीं है। नगर के मलबे और कचरे की समस्या कैसे निपटाई जाए इसकी भी कोई योजना नहीं है। शुक्ला का कहना है कि लगभग आधा मलबा नगर के विभिन्न क्षेत्रों में जला दिया जाता है। बाकी यमुना नदी किनारे डाल दिया जाता है।