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काउंटर लगाकर बेची जा रही गरीबी

Sat, 06 Aug 2016 11:52 PM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Sat, 06 Aug 2016 11:52 PM IST
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fraud in ration card decision
राशन कार्ड का अपग्रेडेशन - फोटो : file photo
जिले में गरीबी का सौदा काउंटर लगाकर हो रहा है। जिलापूर्ति विभाग और निजी कर्मचारी मिलकर 500 से लेकर 1000 रुपये तक में राशन के लिए लोगों को गरीब और अमीर बना रहे हैं। जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक यह खेल धड़ल्ले से जारी है।
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बता दें कि जिले में 6.47 लाख राशन कार्ड धारक हुआ करते थेे। इसमें अंत्योदय के साथ बीपीएल श्रेणी के कार्ड धारकों की संख्या भी शामिल थी। नई व्यवस्था के तहत राशन कार्ड धारकों की संख्या घटकर 4.70 लाख रह गई है। आपूर्ति विभाग के मुताबिक उन्हें आबादी के मुताबिक शहर में 64.11 प्रतिशत और देहात में 79.56 प्रतिशत राशन कार्ड ही बनाने हैं, जो बन चुके हैं। हालांकि इनका प्रकाशन होना अभी बाकी है।
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अब प्रकाशन से पहलने पहले आपूर्ति निरीक्षकों के दफ्तरों में बीते छह माह से राशन कार्ड धारकों को बदलने का खेल चल रहा है। आरोप है कि कार्ड धारकों के नाम फीड करने वाले प्राइवेट कर्मचारी बीते छह माह से आपूर्ति निरीक्षक के साथ मिलकर गरीब को अमीर और अमीर को गरीब बनाने में जुटे हैं।
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इसकी कीमत भी 500 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक है। इतना ही नहीं, राशन के खेल में जुटा यह गठबंधन बन चुके राशन कार्ड धारकों के नाम तक लिस्ट से गायब कर देता है। इसकी कीमत भी अलग से तय है। 
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